गुजरात विधानसभा में UCC विधेयक पारित, शादी और लिव-इन का पंजीयन जरूरी; जानें बड़े प्रावधान
क्या है खबर?
गुजरात विधानसभा ने समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक को पारित कर दिया है। इसी के साथ गुजरात उत्तराखंड के बाद UCC विधेयक पारित करने वाला दूसरा राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने विधानसभा में विधेयक पेश किया था, जिस पर 7 घंटे से ज्यादा समय तक बहस हुई। कांग्रेस ने इसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन और मुस्लिम-विरोधी बताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। आइए विधेयक के अहम प्रावधान जानते हैं।
शादी
शादी का पंजीयन न करने पर 25,000 रुपये तक जुर्माना
यह विधेयक एक ही शादी को अनिवार्य बनाता है। इसके अलावा उन शादियों को अमान्य घोषित करने का भी प्रावधान है, जिनमें पहचान छिपाई गई हो। विधेयक में शादी में धोखाधड़ी, जबरदस्ती या गलत जानकारी देने से जुड़े मामलों के लिए भी सजा का प्रावधान है। हर शादी का पंजीयन जरूरी होगा। ऐसा न करने पर 25,000 रुपये तक जुर्माना लग सकता है। जबरन शादी और बहुविवाह पर 7 साल तक की सजा हो सकती है।
लिव-इन
लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी सख्त प्रावधान
लिव-इन रिलेशनशिप का भी पंजीयन जरूरी होगा। अगर लड़का या लड़की की उम्र 21 साल से कम है, तो अभिभावकों को जानकारी देनी जरूरी होगी। लिव-इन रिलेशनशिप की घोषणा के 30 दिन के भीतर पंजीयन करवाना होगा। अगर कोई बिना पंजीयन के एक महीने से ज्यादा समय तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है, तो उसे 3 महीने की कैद या 10,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। अलग होने पर महिला भरण-पोषण की हकदार होगी।
संपत्ति
बेटियों को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार
विधेयक में एक बड़े प्रावधान के तहत पैतृक संपत्ति में बेटे और बेटी को समान अधिकार दिया गया है। अगर माता-पिता संपत्ति को लेकर वसीयत नहीं करते हैं, तो संपत्ति को माता-पिता, पति/पत्नी और बच्चों के बीच समान रूप से वितरित किया जाएगा। इसके अलावा अन्य प्रावधानों में नाबालिग के साथ लिव-इन में रहने पर POCSO के तहत कार्रवाई, कोर्ट के बाहर तलाक अमान्य, उल्लंघन पर 3 साल की सजा जैसे प्रावधान हैं।
बयान
मुख्यमंत्री बोले- विधेयक से किसी भी समुदाय के साथ अन्याय नहीं होगा
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा, "यह विधेयक खासतौर पर बहन-बेटियों के हितों को ध्यान में रखते हुए लाया गया है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को गति देने की दिशा में हमने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विधेयक को इस तरह तैयार किया गया है कि किसी भी समुदाय के साथ अन्याय न हो। यह सबको न्याय, किसी का तुष्टिकरण नहीं सिद्धांत पर आधारित है। इसमें महिलाओं को समान भागीदारी देने का प्रावधान है, जिससे बेटियों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी।"