केंद्र ने शुरू की आंदोलनों को रोकने की तैयारी, राज्यों से मांगी गई विरोध-प्रदर्शनों की जानकारी
क्या है खबर?
ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (BPRD) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस प्रमुखों से आजादी के बाद हुए आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों की जानकारी मांगी है। खासतौर से उन आंदोलनों की जानकारी मांगी गई है, जो 1974 के बाद हुए हैं। इन जानकारियों में आंदोलन का कारण, उसके आयोजक, संरचना और विचारधारा समेत तमाम रिकॉर्ड शामिल हैं। इसका इस्तेमाल आंदोलनों को रोकने के लिए व्यापक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बनाने के लिए किया जाएगा।
रिपोर्ट
सभी राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों के DG को भेजा गया पत्र
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, सभी पुलिस महानिदेशकों (DG) को भेजे गए पत्र में BPRD के एक ADG रैंक के अधिकारी ने कहा, "सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से अनुरोध है कि वे अपने-अपने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में आजादी के बाद के सभी विरोध प्रदर्शनों का विवरण प्रदान करें। जरूरी जानकारी कृपया NIC लिंक के माध्यम से साझा की जाए।" सितंबर में गृह मंत्री अमित शाह ने BPRD को आंदोलनों को रोकने के लिए SOP तैयार करने के निर्देश दिए थे।
सवाल
क्या-क्या जानकारी मांगी गई है?
रिपोर्ट के मुताबिक, राज्यों से प्रमुख विरोध प्रदर्शनों से जुड़े 13 सवालों के जवाब मांगे गए हैं। इनमें आंदोलन का साल-जगह, उत्पत्ति का कारण, आयोजकों की जानकारी, प्रदर्शनकारियों की संख्या, संरचना और विचारधारा, रणनीतियां, आंदोलन का विकास, किसी हिंसक घटना की तात्कालिक गतिशीलता, आंदोलन की सफलता या असफलता, सार्वजनिक संपत्ति या अन्य नुकसान और उससे मिले सबक की जानकारी शामिल है। इसका उद्देश्य प्रदर्शनों के कारण, वित्तीय पहलुओं और पर्दे के पीछे के खिलाड़ियों का विश्लेषण करना है।
गृह मंत्रालय
भीड़ नियंत्रण को लेकर गृह मंत्रालय ने बनाई थी गाइडलाइन
सितंबर में गृह मंत्रालय ने भीड़ नियंत्रण को लेकर 'क्राउड कंट्रोल एंड मास गैदरिंग मैनेजमेंट' नामक दिशानिर्देश तैयार किए थे। इनका उद्देश्य विरोध प्रदर्शनों और बड़े आयोजनों के दौरान भीड़ पर काबू रखना है। इसमें सभाओं और प्रदर्शनों के प्रबंधन के तरीके बताए गए हैं। सोशल मीडिया प्रबंधन, भीड़ प्रबंधन में मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक पहलू भी इसमें शामिल हैं। इसके अलावा गैरकानूनी जमावड़ों और आक्रामक प्रदर्शनों के लिए तैनाती के मॉडल दिए गए हैं।
वजह
पड़ोसी देशों में हुए आंदोलनों से सबक
सरकार ये कदम ऐसे वक्त उठा रही है, जब भारत के 3 पड़ोसी देशों- नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका में हिंसक प्रदर्शन हुए हैं। नेपाल में जेन जी आंदोलन भड़कने के बाद केपी शर्मा ओली को प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा था। इसी तरह बांग्लादेश और श्रीलंका में भी हिंसक आंदोलन हुए। इसके अलावा हाल ही में भगदड़ की घटनाएं भी बढ़ी हैं। कुंभ मेले, स्टेडियम में आयोजन, धार्मिक आयोजन, प्रवचन आदि को लेकर भी सरकार ने दिशानिर्देश बनाए हैं।