100 करोड़ का AI बूस्ट: GSI अब 'स्मार्ट' नक्शों से ढूंढेगा भारत के छिपे खजाने
भारत में कीमती खनिजों की खोज को गति देने के लिए, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण बेंगलुरु में 100 करोड़ रुपये की लागत से एक नया AI-संचालित सेंटर स्थापित करने जा रहा है। डेटा प्रोसेसिंग, इंटरप्रिटेशन और इंटीग्रेशन सेंटर (DPIIC) नाम का यह केंद्र अगले 5 सालों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करके 8.50 लाख वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र की छानबीन करेगा। इसका लक्ष्य उन खनिजों का पता लगाना है जो स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए आवश्यक हैं।
DPIIC बनाएगा 'स्मार्ट' खनिज नक्शे
यह केंद्र भूवैज्ञानिक डेटा और सैटेलाइट से मिली बड़ी मात्रा में जानकारी जुटाएगा। AI का इस्तेमाल करके यह ऐसे स्मार्ट अनुमानित नक्शे तैयार करेगा, जिनसे खनिजों के संभावित भंडारों का पता चल पाएगा। इसकी मदद से वैज्ञानिक महंगे जमीनी सर्वेक्षण पर बड़ा खर्च करने से पहले ही यह बेहतर ढंग से जान पाएंगे कि किन जगहों पर महत्वपूर्ण खनिज मिलने की अधिक संभावना है।
DPIIC भूवैज्ञानिक सूचनाओं के एक केंद्रीय हब के तौर पर भी काम करेगा। इससे नीति-निर्माताओं के लिए खनिजों की खोज से लेकर खनन तक की प्रक्रिया को तेज करना आसान हो जाएगा। खासकर ऐसे समय में जब दुनिया भर में खनिजों की मांग तेजी से बढ़ रही है, यह पहल बहुत मायने रखती है।