दिल्ली की यमुना में 1,300 टन गोबर, 5 नए प्लांट देंगे नदी को जीवनदान
दिल्ली नगर निगम के मुताबिक, हर दिन लगभग 1300 टन बिना साफ किया गया पशुओं का गोबर यमुना नदी में मिल रहा है। शहर की वैध और अवैध दोनों तरह की डेयरियां इस भारी प्रदूषण की वजह हैं।
फिलहाल केवल 200 टन गोबर का ही निपटान हो पाता है। यह निपटान दक्षिण-पश्चिम दिल्ली की नंगली डेयरी में बने एक बायो गैस प्लांट में होता है। खास बात ये है कि यह प्लांट पूरे शहर में अकेला चालू प्लांट है।
5 नए बायो गैस प्लांट लगाने की तैयारी
इस समस्या को हल करने के लिए, MCD ने 15 जुलाई 2026 को नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के साथ साझेदारी की है। दोनों मिलकर घोघा और गाजीपुर जैसी जगहों पर नए बायो गैस प्लांट स्थापित करने की योजना बना रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि ये पांचों प्लांट जून 2027 तक बनकर तैयार हो जाएंगे।
एक बार सभी प्लांट चालू होने के बाद, गोबर के निपटान की कुल क्षमता बढ़कर 1625 टन प्रतिदिन हो जाएगी। यह मात्रा मौजूदा गोबर उत्पादन से भी अधिक होगी। अधिकारियों का मानना है कि पशुओं के इस कचरे से निपटना यमुना नदी को बचाने और उसके बिगड़ते पर्यावरण को सुधारने के लिए बेहद जरूरी है।