8वां वेतन आयोग: अब माता-पिता भी वेतन दायरे में आएंगे, न्यूनतम वेतन में 30,000 रुपये का इजाफा संभव
कर्मचारी यूनियनें 8वें वेतन आयोग से वेतन का फॉर्मूला बदलने की मांग कर रही हैं ताकि यह आज के पारिवारिक ढांचे के मुताबिक हो। फिलहाल, न्यूनतम वेतन की गणना सिर्फ तीन लोगों (कर्मचारी, उसकी पत्नी और बच्चों) के लिए होती है, लेकिन यूनियनों का कहना है कि अब आश्रित माता-पिता को भी इसमें शामिल करने का वक्त आ गया है, जो भारतीय परिवारों में एक सामान्य बात है। ऑल इंडिया NPS एम्प्लॉइज फेडरेशन का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था पुरानी हो चुकी है और यह मध्यम वर्गीय परिवारों की वास्तविक चुनौतियों से मेल नहीं खाती।
न्यूनतम वेतन 30,000 रुपये तक हो सकता है
अगर वेतन का फॉर्मूला 5 सदस्यों के हिसाब से बदल दिया जाए, तो न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये से बढ़कर 30,000 रुपये प्रति माह हो सकता है। इसमें 58 प्रतिशत महंगाई भत्ता (DA) शामिल कर दिया जाए, तो यह आंकड़ा और ऊपर जा सकता है, जो लगभग 47,400 रुपये तक पहुंच जाएगा। वहीं, पोषण और रोजमर्रा के खर्चों को भी इसमें जोड़ा जाए, तो यह राशि हर महीने 55,000 से 60,000 रुपये तक पहुच सकती है। यूनियनें यह तर्क देती हैं कि यह बदलाव बेहद जरूरी है क्योंकि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, आवास और बुजुर्गों की देखभाल के खर्चे लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में वेतन को भी वास्तविक जीवन की बढ़ती जरूरतों के साथ तालमेल बिठाना चाहिए।