चुनाव आयोग ने नए मतदाताओं के लिए फॉर्म-6 में किया बदलाव, मांगी गई SIR से जुड़ी जानकारी
क्या है खबर?
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विवादों के बीच चुनाव आयोग ने अब नए मतदाता बनने के लिए जरूरी जानकारी में भी बदलाव किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, नए मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6 में अब माता-पिता के SIR से जुड़ी जानकारी मांगी गई है। हालांकि, फिलहाल ये बदलाव केवल ऑनलाइन फॉर्म में हुआ है, जबकि ऑफलाइन फॉर्म में पहले की ही तरह है।
रिपोर्ट
फॉर्म में क्या हुए बदलाव?
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, फॉर्म 6 में एक 'डिक्लेरेशन' है, जिसमें आवेदक से SIR की जानकारी मांगी गई है। यहां 3 विकल्प हैं। पहला- मेरा नाम पिछले SIR इलेक्टोरल रोल में है। दूसरा- मेरे माता-पिता (दादा, दादी) का नाम पिछले SIR में है। तीसरा- न तो मेरा और न ही मेरे माता-पिता का नाम पिछले SIR में है। पहले 2 विकल्प चुनने पर आवेदक से विधानसभा क्षेत्र, बूथ नंबर और अपने या अपने माता-पिता के नाम का सीरियल नंबर देना होता है।
आरोप
आयोग पर नियमों के उल्लंघन के आरोप
रिपोर्ट के मुताबिक, फॉर्म-6 का कानूनी आधार जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत बनाए गए मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 से प्राप्त होता है। अधिनियम की धारा 28 में प्रावधान है कि केंद्र सरकार चुनाव आयोग से परामर्श करने के बाद आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना जारी कर नियम बना सकती है। रिपोर्ट में आयोग के पूर्व अधिकारियों के हवाले से कहा गया है, "फॉर्म में मामूली बदलाव के लिए भी नियमों में संशोधन और कानून मंत्रालय द्वारा अधिसूचना की जरूरत होती है।"
सवाल
क्यों उठ रहे हैं सवाल?
दरअसल, ये बदलाव ऐसे वक्त सामने आया है, जब SIR को लेकर पूरे देश में विवाद का माहौल है। 10 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में हुए SIR के बाद 5.58 करोड़ से ज्यादा नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। ऐसे में इन लोगों के बच्चों पर इस कदम का असर पड़ सकता है। पश्चिम बंगाल में तो विचाराधीन 27 लाख से ज्यादा मतदाता विधानसभा चुनावों में मतदान नहीं कर पाए, क्योंकि उनकी अपील ट्रिब्यूनल में लंबित है।
बिहार
बिहार और असम के फॉर्म में नहीं दिख रहा बदलाव
रिपोर्ट के मुताबिक, फॉर्म में ये बदलाव उन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दिखाई दे रहा है, जहां 2025-26 के दौरान SIR हो चुका है। हालांकि बिहार और असम के फॉर्म में ऐसा नहीं है। आयोग की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि अगर कोई आवेदक तीसरा विकल्प चुनता है, यानी उसके या उसके माता-पिता का नाम पिछले SIR में नहीं था, तो उसके आवेदन की जांच या प्रक्रिया पर क्या असर होगा।