महाराष्ट्र में मतदाता सूची से हटे 2 करोड़ से ज़्यादा मतदाताओं के नाम, सियासी हस्तक्षेप के आरोप
महाराष्ट्र सरकार ने मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान मतदाता फॉर्म जमा न होने के कारण 2.07 करोड़ से भी ज्यादा मतदाताओं को मतदाता सूची से हटा दिया है। राज्य में कुल 9.78 कोड़ पंजीकृत मतदाता थे, जिनमें से अब तक केवल 7.69 करोड़ के रिकॉर्ड ही डिजिटाइज हो पाए हैं।
SEC ने मौतों, प्रवास और शहरीकरण को बताया वजह
राज्य चुनाव आयोग के मुताबिक, मतदाता सूची से हटाए गए ज्यादातर लोग ऐसे थे जिनकी या तो मौत हो चुकी थी, या वे हमेशा के लिए दूसरी जगह चले गए थे, या फिर उनका कोई अता-पता नहीं था। साल 2002 के बाद से तेजी से हुए शहरीकरण और बड़े पैमाने पर हुए पलायन ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है। मुंबई, पुणे और ठाणे जैसे शहरी इलाकों में सबसे ज्यादा मतदाता फॉर्म जमा नहीं हो पाए।
रोहित पवार का आरोप- भाजपा ने जांच में किया हस्तक्षेप
शरद पवान गुट वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के रोहित पवार ने इस पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने सत्यापन के काम में हस्तक्षेप किया और मतदाताओं को उनकी राजनीतिक विचारधारा के हिसाब से छांटने के लिए सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया।