मानसून भी न धो पाया यमुना का प्रदूषण, मल कोलीफॉर्म निर्धारित सीमा से कई गुना ऊपर
जुलाई की मानसूनी बारिश के बाद भी यमुना नदी में प्रदूषण का स्तर अब भी काफी चिंताजनक बना हुआ है। DPCC की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, असगरपुर में मल कोलीफॉर्म का स्तर थोड़ा घटकर 390,000 से 320,000 MPN प्रति 100 मिलीलीटर हो गया है।
हालांकि, यह मात्रा अभी भी CPCB द्वारा तय की गई सुरक्षित सीमा 2,500 से कई गुना अधिक है। इससे साफ है कि बारिश से नदी के प्रदूषण में कोई खास सुधार नहीं आया है।
देरी से मानसून, यमुना की सफाई में मुश्किल
जिन 7 जगहों पर निगरानी की गई, उनमें से केवल पल्ला में ही मल कोलीफॉर्म का स्तर तय मानक के भीतर मिला। नदी के ज्यादातर हिस्सों में घुली हुई ऑक्सीजन (डिजॉल्व्ड ऑक्सीजन) का स्तर बहुत कम है, जो कभी-कभी शून्य तक भी पहुंच जाता है। यह स्थिति जलीय जीवन के लिए बेहद खतरनाक है।
इसके अलावा, BOD (बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड) का स्तर भी निचले बहाव क्षेत्र में काफी बढ़ गया है, जो नदी के स्वास्थ्य के लिए बिल्कुल सही नहीं माना जाता। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की देरी से आई बारिश के कारण नदी में पानी का बहाव कम है। ऐसे में, प्रदूषण को पतला करने के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता, जिससे यमुना की सफाई का काम और भी मुश्किल हो गया है।