पिछले दो दशकों में IITs में छात्रों की मौतें 135 प्रतिशत बढ़ीं- रिपोर्ट
IIT कानपुर के पूर्व छात्र और अनुसूचित जाति-जनजाति (SC/ST) के छात्रों की मदद करने वाले 'ग्लोबल IIT एलुमनाई सपोर्ट ग्रुप' के संस्थापक धीरज सिंह ने अपनी नई रिपोर्ट में IITs में छात्रों की आत्महत्याओं और अन्य अप्राकृतिक मौतों में चिंताजनक बढ़ोतरी की बात सामने रखी है।
रिपोर्ट बताती है कि साल 2006 से 2026 के बीच कम से कम 171 छात्रों ने अपनी जान गंवाई। पिछले दो दशकों में यह आंकड़ा 135 प्रतिशत बढ़ गया है। इन आत्महत्याओं में से करीब 82 प्रतिशत IIT कैंपस में ही हुईं। खासकर परीक्षा के दौरान और नतीजों के ठीक बाद ऐसे मामले ज्यादा सामने आए हैं।
SC/ST छात्रों में आत्महत्या की दर करीब दोगुनी
यह रिपोर्ट इस बात पर भी जोर देती है कि सामान्य वर्ग के छात्रों की तुलना में SC और ST छात्रों में आत्महत्या की दर करीब-करीब दोगुनी है। कोविड-19 के बाद तो यह फासला और भी बढ़ गया है। जिन SC/ST छात्रों की मौत हुई, तब उनकी उम्र बाकी छात्रों से कम थी।
ध्यान देने वाली बात यह है कि पुरुष BTech छात्र और महिला PhD छात्राएं एक बहुत ही संवेदनशील वर्ग के रूप में सामने आए हैं। बीते 20 सालों में हुई कुल आत्महत्याओं में से करीब 60 प्रतिशत इन्हीं दोनों वर्गों के छात्रों की हैं। यह IITs में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य सपोर्ट और सामाजिक दबावों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।