दिल्ली के नल में गंदा पानी, जंग लगी पाइपलाइनें बनीं सेहत का दुश्मन
दिल्ली में नल के पानी में गंदगी एक बड़ी समस्या बन गई है। इसकी मुख्य वजह पुरानी और जंग लगी पाइपलाइन और उनसे होने वाला रिसाव है। इन रिसावों के जरिए सीवर का गंदा पानी और बारिश का पानी पीने के पानी की सप्लाई लाइन में मिल जाता है, जिससे पानी दूषित हो जाता है। शहर की बढ़ती आबादी और पानी की लगातार बढ़ती मांग से इन पुरानी पाइपलाइनों पर और ज्यादा दबाव पड़ रहा है। इसके अलावा, कम दबाव वाले इलाकों में लोग अपने घरों में पानी के लिए जो पंप लगाते हैं, वे कई बार दूषित पानी को सप्लाई लाइन में खींच लेते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि जितनी पानी की सप्लाई होती है, उसका करीब 40 प्रतिशत हिस्सा 'नॉन-रेवेन्यू वाटर' के तौर पर बर्बाद हो जाता है, यानी बिना किसी शुल्क के यह पानी बह जाता है।
विशेषज्ञों ने SCADA और IoT सिस्टम अपनाने पर जोर दिया
विशेषज्ञों का मानना है कि अब सिर्फ अस्थायी समाधान (जुगाड़) से काम नहीं चलेगा, बल्कि आधुनिक तकनीक अपनाने की जरूरत है। द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TERI) की डॉ. फौजिया तरन्नुम ने सुझाव दिया है कि पानी के नेटवर्क को मॉनिटर करने के लिए SCADA सिस्टम और IoT सेंसर्स का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इनकी मदद से पूरे पानी के नेटवर्क पर 24 घंटे नजर रखी जा सकेगी और किसी भी गड़बड़ी या खराबी का समय रहते पता लगाकर उसे ठीक किया जा सकेगा। डॉ. तरन्नुम का एक अहम सुझाव यह भी है कि सिर्फ पुरानी पाइपलाइनों को बदलकर नई लगा देने भर से काम नहीं चलेगा। जब तक नई पाइपलाइनों की ठीक से निगरानी नहीं की जाती, तब तक हम उसी पुरानी समस्या से जूझते रहेंगे। उनका तर्क है कि अगर नई पाइपलाइनों की उचित देखभाल नहीं की गई, तो नया सिस्टम भी जल्द ही दूषित होने लगेगा।