दिल्ली का 2030 का मास्टरस्ट्रोक: जलवायु चुनौतियों से निपटने को बनाई योजना
दिल्ली ने अपनी जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना (SAPCC) 2.0 को मंजूरी के लिए पेश किया है। इसका मकसद 2030 तक शहर को जलवायु संबंधी चुनौतियों से निपटने में मदद करना है। 28 अप्रैल को पेश किया गया यह नया वर्जन 2019 के पुराने प्लान की जगह लेगा। इसमें ताजा डेटा शामिल किया गया है, जो भारत के वैश्विक जलवायु वादों, जैसे पेरिस समझौते के तहत किए गए वादों के हिसाब से है।
दिल्ली का SAPCC 2.0 प्रकृति आधारित समाधानों पर जोर देता है
इस योजना का मुख्य जोर दिल्ली को और ज्यादा हरा-भरा बनाने पर है। इसमें ज्यादा नगर वन (शहरी जंगल) लगाना और जमीन का समझदारी से इस्तेमाल करना शामिल है।
यह प्लान शहरी योजना और पानी के प्रबंधन में भी प्रकृति-आधारित समाधानों को बढ़ावा देगा। यह कदम जैव विविधता की रक्षा के लिए चल रहे वैश्विक प्रयासों से भी जुड़ा है।
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने इस बारे में बताया कि, "इसमें जलवायु विज्ञान के नए अपडेट, ताज़ा डेटासेट और जिला स्तर पर कमजोरी का आकलन शामिल है। साथ ही, इसमें 2030 तक के लिए अलग-अलग क्षेत्रों के हिसाब से शमन (उत्सर्जन कम करना) और अनुकूलन (जलवायु बदलावों के हिसाब से ढलना) के ऐसे लक्ष्य तय किए गए हैं, जिन्हें मापा जा सकता है।"