प्रदूषण से निपटने के लिए क्लाउड सीडिंग पर विचार कर रही दिल्ली सरकार, पिछले साल रही थी नाकाम
दिल्ली अपने बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए क्लाउड सीडिंग पर विचार कर रही है। यह एक ऐसी तकनीक है जिसमें बादलों में कुछ रसायन छोड़े जाते हैं, जिससे बारिश हो सके। इसे प्रदूषण का एक ‘फौरी’ हल माना जा रहा है।
उम्मीद है कि यह बारिश जहरीली धुंध (स्मॉग) को धो देगी और तापमान भी कम करने में मदद मिलेगी। लेकिन विशेषज्ञ आगाह कर रहे हैं कि भले ही यह कुछ समय के लिए राहत दे, पर इससे आस-पास के इलाकों में बारिश का पैटर्न बिगड़ सकता है।
पिछले साल क्लाउड सीडिंग रही नाकाम
पिछले साल दिल्ली ने IIT कानपुर के साथ मिलकर क्लाउड सीडिंग का प्रयोग किया था, पर उससे कोई बारिश नहीं हुई। इसके बावजूद, हवा की गुणवत्ता जिस तरह चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है, उसे देखते हुए दिवाली और छठ पूजा के बाद और प्रयोग करने पर विचार किया जा रहा है।
अर्थशास्त्री माइकल ग्रीनस्टोन का कहना है कि क्लाउड सीडिंग से कुछ समय के लिए तो राहत मिल सकती है, लेकिन यह कोई स्थायी समाधान नहीं है। ग्रीनस्टोन कहते हैं कि यह तकनीक भले ही स्थानीय स्तर पर काम आ जाए, पर यह प्रदूषण नियंत्रण के लिए बने नियमों और लंबे समय के उपायों की जगह नहीं ले सकती।