दिल्ली हाई कोर्ट कहा- प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज अलग-थलग घटना नहीं, CCTV फुटेज सुरक्षित रखें
क्या है खबर?
दिल्ली में सोमवार को प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई लाठीचार्ज के मामले पर दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई की। मामले में 2 याचिकाएं दायर की गई हैं। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और तेजस कारिया की पीठ ने याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए मामलों को अलग-थलग घटना नहीं बताया। कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा और CCTV फुटेज सुरक्षित रखने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी।
सुनवाई
कोर्ट ने क्या कहा?
दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता लाठीचार्ज के मामले में FIR दर्ज करवाना चाहते हैं तो मजिस्ट्रेट कोर्ट या पुलिस के पास जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि याचिका केवल प्रचार के लिए दायर की गई हैं, जिन पर विचार नहीं किया जाना चाहिए।
इस पर कोर्ट ने कहा, "क्या यह एक अलग-थलग घटना थी? शायद नहीं। दूसरा, अगर यह गैरकानूनी जमावड़ा था, तो इससे निपटने की एक प्रक्रिया है।"
सुनवाई
हर व्यक्ति FIR दर्ज नहीं करवा सकता- कोर्ट
कोर्ट ने आगे कहा, "अगर ये मुद्दे जनहित याचिका में उठाए जा रहे हैं, तो आप यह कैसे कह सकते हैं कि हर व्यक्ति जाकर FIR दर्ज कराए? अगर यह अलग-थलग घटना होती, तो स्थिति अलग होती। निजी शिकायत दर्ज कराने के लिए उन्हें पुलिस के पास जाने के लिए कहना शायद सही होता। लेकिन यह अलग-थलग घटना नहीं है।"
कोर्ट ने कहा कि हम अभी वीडियो की पुष्टि करने की स्थिति में नहीं हैं। आपको जवाब दाखिल करना होगा।"
सुनवाई
CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश
याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एन हरिहरन ने कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ अत्यंत क्रूरता बरती गई है।
वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों के हिंसक होने का कोई सबूत नहीं था, फिर भी पुलिस ने उन पर हिंसा की।
कोर्ट ने सुनवाई के बाद निर्देश दिया कि उल्लिखित घटना से संबंधित प्रासंगिक रिकॉर्ड, जिसमें CCTV फुटेज, वीडियोग्राफी पुलिस द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार सुरक्षित रखा जाए।
आरोप
पुलिस पर अवैध हथियार लाने का आरोप
याचिकाकर्ताओं में एक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि कई पुलिसकर्मी वर्दी में थे, लेकिन उनके नाम टैग नहीं थे। वे अवैध हथियार ले जा रहे थे।
उन्होंने अतिरिक्त पुलिस आयुक्त संदीप लांबा के मामले का जिक्र किया, जिन्हें बिना किसी उकसावे के एक महिला को थप्पड़ मारते हुए देखा गया।
उन्होंने कहा कि कई वीडियो में मां और बच्चों पर आंसू गैस के गोले फेंके गए। पुलिस के पास कीलों से लैस लाठियां हैं।