दिल्ली प्लास्टिक से बेहाल: रोज 217 टन कचरा प्रोसेस नहीं हो रहा
दिल्ली में रोजाना करीब 1,155 टन प्लास्टिक कचरा निकलता है, लेकिन इसका करीब 217 टन हिस्सा बिना किसी प्रोसेसिंग के यूं ही पड़ा रहता है। साल 2022 में सिंगल-यूज प्लास्टिक पर पाबंदी लगाई गई थी, इसके बावजूद मार्च 2026 की एक सरकारी रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) में 330 प्लास्टिक कचरा बनाने वाले, 20 ब्रांड मालिक और 420 प्रोसेसिंग यूनिट्स पंजीकृत हैं।
भट्टी का चलन ज्यादा, पायलट प्रोजेक्ट्स में निगरानी की कमी
अभी दिल्ली में प्लास्टिक कचरे को खत्म करने का मुख्य तरीका उसे भट्टी में जलाना ही है। शहर के 4 बड़े वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांटों में ज्यादातर प्लास्टिक को जलाया जा रहा है।
शहर में टॉरिफैक्शन और बायोमाइनिंग जैसी नई तकनीकों का भी परीक्षण किया जा रहा है, जिनकी मदद से पुराने लैंडफिल कचरे को उपयोगी चीजों में बदला जा सकता है। लेकिन हल्के प्लास्टिक को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना अभी भी एक बड़ी चुनौती है।
वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि नियमों को ठीक से लागू न कर पाने की वजह से असल सुधार में अड़चन आ रही है।