#NewsBytesExplainer: दिल्ली में सर्दियों के दौरान क्यों बढ़ता है प्रदूषण, मौजूदा उपाय क्यों नहीं है कारगर?
क्या है खबर?
दिवाली से ठीक पहले दिल्ली में वायु प्रदूषण और भी गंभीर हो गया है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 के करीब पहुंच गया है और कई निगरानी केंद्रों पर प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी में दर्ज किया गया है। स्थिति को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने GRAP के तीसरे चरण को लागू कर दिया है। इसके बाद दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में कई प्रतिबंध लगाए गए हैं। आइए प्रदूषण की वजह समझते हैं।
वजह
दिल्ली में आखिर क्यों होता है इतना प्रदूषण?
दिल्ली में प्रदूषण के कई कारण हैं। इनमें वाहनों और कारखानों से निकलने वाला धुंआ, पड़ोसी राज्यों में जलने वाली पराली, और निर्माण कार्य से जुड़ी गतिविधियां अहम हैं।
इसके अलावा लकड़ी-भट्टी का जलना और सड़कों की धूल भी बड़ी वजह है।
विशेषज्ञ दिल्ली की भौगोलिक स्थिति को भी इसकी एक वजह मानते हैं, जिसके चलते पड़ोसी राज्यों से आने वाली प्रदूषित हवा एक तरह से यहां घिर जाती है।
सर्दी
सर्दियों में ही क्यों बढ़ता है प्रदूषण?
द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TERI) की वरिष्ठ शोधकर्ता डॉक्टर अंजू गोयल ने BBC से कहा कि सर्दियों में जमीन के पास की हवा ठंडी और ऊपर की हवा गर्म होती है, जिसके चलते नीचे की हवा आसानी से ऊपर नहीं जा पाती।
उन्होंने कहा, "अगर हवा की रफ्तार भी कम हो, तो धुआं और धूल जमीन के पास जमा होने लगते हैं। अगर हवा पराली जलने वाले इलाकों से आती है, तो अपने साथ धुआं भी ला सकती है।"
हिस्सा
क्या केवल पराली जलाने से बढ़ता है प्रदूषण?
पराली जलाने की घटनाएं दिल्ली में प्रदूषण की एक वजह है। इसे लेकर खूब राजनीतिक विवाद भी होता है।
CNBC-TV18 से सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट से जुड़े मोहन पी जॉर्ज ने कहा, "पराली जलाने की प्रक्रिया आमतौर पर 15-20 दिन तक चलती है। 15 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच के सबसे खराब दिनों में, यह PM2.5 प्रदूषण का 30-40 प्रतिशत हिस्सा हो सकता है। कोई शक नहीं कि वाहनों से निकलने वाला धुआं एक प्रमुख कारण है।"
वाहन
क्या वाहनों पर प्रतिबंध लगाना समस्या का समाधान है?
प्रदूषण को काबू करने के लिए सबसे पहले वाहनों पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं।
जॉर्ज ने कहा, "इससे मूल समस्या का समाधान नहीं होगा- वाहनों की बढ़ती संख्या। प्रदूषण को एक मौसमी चुनौती के तौर पर देखा जाता है और सर्दियों की शुरुआत में प्रतिबंध लगाए जाते हैं। इस पर पूरे साल ध्यान देने की जरूरत है। कारों की संख्या को नियंत्रित करना, पार्किंग शुल्क बढ़ाना और अंतिम-मील कनेक्टिविटी में सुधार करना एक व्यापक रणनीति का हिस्सा होना चाहिए।"
हिस्सेदारी
प्रदूषण में किस वजह की कितनी हिस्सेदारी?
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (CSE) के मुताबिक, अक्टूबर-नवंबर 2025 में पराली के धुएं का औसत हिस्सा 4.2 प्रतिशत था।
नवंबर में कुछ समय के लिए यह 22 प्रतिशत के आसपास हो गया था। फिर दिसंबर में पराली का हिस्सा घटकर केवल 0.2 फ़ीसदी रह गया। इसके बावजूद दिल्ली की हवा में PM2.5 की औसत मात्रा 163 से बढ़कर 210 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर हो गई।
यानी पराली का असर लगभग खत्म होने के बावजूद हवा और खराब हो गई।
निर्माण कार्य
क्या निर्माण कार्यों पर रोक लगाना कारगर उपाय है?
सार्थक एडवोकेट्स एंड सॉलिसिटर्स के अभिषेक त्रिपाठी CNBC-TV18 से कहा, "निर्माण और विध्वंस गतिविधियों से पैदा धूल को नियंत्रित करने की जरूरत है, लेकिन हर साल 3-4 महीने के लिए निर्माण कार्यों को रोकना व्यापक आर्थिक प्रभाव डाल सकता है। इसके बजाय ऐसी तकनीकों और बुनियादी ढांचे पर काम हो, जो निर्माण स्थलों पर धूल कम कर सके। मौसमी प्रतिबंधों पर निर्भर रहने के बजाय निर्माण कार्य और सड़क की धूल को अधिक प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जाना चाहिए।"
इलेक्ट्रिक वाहन
इलेक्ट्रिक वाहन किस हद तक कारगर हो सकते हैं?
इलेक्ट्रिक वाहन (EV) वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद कर सकते हैं।
हालांकि, त्रिपाठी ने कहा, "उनके व्यापक उपयोग के लिए एक मजबूत नीतिगत प्रोत्साहन और पर्याप्त सहायक बुनियादी ढांचे की जरूरत होगी। मैं शहर के भीतर EV को ज्यादा अपनाने का समर्थन करता हूं। लेकिन पहली बार EV खरीदने वालों को पारंपरिक वाहनों के बजाय EV के लिए प्रोत्साहित करने के लिए बुनियादी ढांचे से संबंधित चिंताओं का समाधान करना जरूरी है।"