प्रदूषण नियंत्रण की दोहरी तलवार: दिल्ली-NCR में 10 लाख श्रमिकों की रोजी-रोटी पर आया संकट
दिल्ली-NCR के नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद और गाजियाबाद में 5 से 20 नवंबर तक निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी गई है। वहीं, दिल्ली में भी बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने के लिए निजी निर्माण पर 1 नवंबर से 31 जनवरी, 2027 तक अलग से पाबंदी रहेगी। बेशक, इस कदम का मकसद साफ हवा और लोगों का बेहतर स्वास्थ्य है, लेकिन यह पाबंदी करीब 10 लाख मजदूरों की रोजी-रोटी पर बुरा असर डाल सकती है। इनमें से कई मजदूर दिहाड़ी पर काम करते हैं, जिनके लिए यह समय काफी मुश्किल भरा होगा।
उद्योग जगत ने की ठोस उपाय और चरणबद्ध प्रतिक्रिया की मांग
बड़े बिल्डर तो शायद अपनी परियोजना की समय-सीमा आगे बढ़ाकर काम चला लेंगे, लेकिन छोटे ठेकेदारों और प्रवासी मजदूरों के लिए यह मुश्किल भरा दौर होगा। उन्हें काम न मिलने से आमदनी का नुकसान होगा और प्रोजेक्ट भी अटक जाएंगे। दिनेश गुप्ता जैसे उद्योग जगत के कई लोग अधिकारियों से यह अपील कर रहे हैं कि वे केवल एकतरफा पाबंदियां लगाने के बजाय प्रदूषण के मुख्य कारणों, जैसे ट्रैफिक पर ज्यादा ध्यान दें। कुछ लोग यह सुझाव भी दे रहे हैं कि वास्तविक समय की वायु गुणवत्ता के आधार पर चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई की जाए। इससे रोजगार भी बचेंगे और हवा भी साफ होगी दोनों के बीच एक अच्छा संतुलन बन पाएगा।