छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का लिव-इन पर बड़ा फैसला, शादी से मुकरे पार्टनर तो बलात्कार नहीं
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि अगर कोई लिव-इन रिलेशनशिप में सालों साथ रहने के बाद अपने पार्टनर से शादी करने से मना कर देता है, तो उसे बलात्कार नहीं माना जा सकता। इस मामले में, महिला ने अपने पार्टनर को बलात्कार के आरोपों से बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ अपील की थी। लेकिन कोर्ट ने यह माना कि लिव-इन रिलेशनशिप में शारीरिक संबंध बनाने के लिए सहमति आमतौर पर पहले से ही मौजूद होती है।
जजों ने कहा- सिर्फ शादी की बात काफी नहीं
जजों ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि लिव-इन रिलेशनशिप के दौरान सिर्फ शादी की बातें कर लेने भर से यह साबित नहीं हो जाता कि शारीरिक संबंध केवल शादी के वादे पर ही बनाए गए थे। कोर्ट ने यह भी कहा कि लिव-इन में रह रहे दोनों पार्टनर अच्छी तरह जानते हैं कि वे कानूनी या औपचारिक तौर पर शादीशुदा नहीं हैं। ऐसे में उनके साथ रहने का समय, उनका आपसी व्यवहार और उनके रिश्ते की प्रकृति को देखकर ही यह तय किया जा सकता है कि सहमति थी या नहीं। कोर्ट के इस फैसले से लिव-इन रिलेशनशिप और सहमति से जुड़े भविष्य के मामलों के लिए एक नई दिशा तय हो गई है।