असम की 'जल प्रलय' ने तोड़ा 60 साल का रिकॉर्ड: क्यों फेल हो रहे पुराने इंतजाम?
असम के पूर्वी जिले—चारिआईदो, जोरहाट और शिवसागर—इस समय पिछले 60 साल से भी ज्यादा की सबसे भयंकर बाढ़ की चपेट में हैं। राज्य की 94 प्रतिशत से ज्यादा बाढ़ प्रभावित आबादी इन्हीं इलाकों में रहती है। दरअसल, नागालैंड में हुई भारी बारिश के कारण 18 से 20 जुलाई के बीच बारिश का स्तर सामान्य से 5 गुना ज्यादा हो गया था। अचानक आई इस बाढ़ ने हजारों लोगों के लिए जीना मुश्किल कर दिया है।
विशेषज्ञों ने बेहतर बाढ़ प्रबंधन की अपील की है
इतनी तेज बारिश हुई कि जिन इलाकों में आमतौर पर बाढ़ नहीं आती थी, वे भी पानी में डूब गए। जैसे सोनाड़ी में एक ही रात में 190 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। जलवायु परिवर्तन और नदी के तटबंधों की कमजोरी ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है।
अब यह साफ हो गया है कि असम की पुरानी बाढ़ प्रबंधन रणनीतियां अब काफी नहीं हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि असम को इस चुनौती से उबरने और भविष्य के लिए तैयार रहने के लिए समझदारी भरी योजनाएं बनाने की जरूरत है। इसमें बाढ़ रोधी ढांचा तैयार करना, जल निकायों (तालाबों और झीलों) को फिर से सजीव करना और पड़ोसी राज्यों के साथ बेहतर तालमेल बिठाना जैसी बातें शामिल हैं।