केंद्रीय जल आयोग की चेतावनी, 166 जलाशयों में भरा है सिर्फ एक-तिहाई पानी
केंद्रीय जल आयोग ने जानकारी दी है कि देश में पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। देश के 166 प्रमुख जलाशयों में सिर्फ एक-तिहाई पानी ही बचा है। हालांकि, पिछले हफ्ते से इसमें थोड़ा सुधार दिखा है, लेकिन पिछले साल की तुलना में यह अब भी काफी कम है। इस पानी की कमी का सीधा असर पीने के पानी, खेती-बाड़ी और उद्योगों पर दिखने लगा है।
विशेषज्ञों ने दी यह अहम सलाह
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून का पैटर्न गड़बड़ा गया है। इससे बारिश की विश्वसनीयता कम हो गई है और पानी की आपूर्ति पर बुरा असर पड़ रहा है। पूर्व जल संसाधन सचिव एस सरकार ने बताया कि हम बारिश के कुल पानी का केवल 8 प्रतिशत ही जमा कर पाते हैं। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की सुष्मिता सेनगुप्ता के अनुसार, दूर-दूर तक पानी ले जाने वाली पाइपलाइनों से 40 से 50 प्रतिशत पानी लीक होकर बर्बाद हो जाता है। आज प्रति व्यक्ति सालाना पानी की उपलब्धता घटकर सिर्फ 1,500 क्यूबिक मीटर रह गई है, जबकि 1950 में यह 5,000 क्यूबिक मीटर थी। इस स्थिति से निपटने के लिए विशेषज्ञों ने तुरंत कदम उठाने की सलाह दी है। उन्होंने सुझाव दिया है कि हमें इस्तेमाल किए गए पानी को साफ करके दोबारा उपयोग में लाना चाहिए, सिंचाई के लिए बेहतर और आधुनिक तरीके अपनाने चाहिए, ज्यादा से ज्यादा बारिश के पानी को जमा करना चाहिए और स्थानीय तालाबों व झीलों को फिर से जिंदा करना चाहिए, ताकि हालात और न बिगड़ें।