CBSE की डिजिटल मार्किंग पर बवाल: क्या आनन-फानन में हुए फैसले से लाखों छात्रों के अंक खतरे में?
CBSE ने क्लास 12 की बोर्ड परीक्षाओं के लिए अचानक से डिजिटल ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम लागू कर दिया है। इस फैसले से छात्र और उनके अभिभावक बेहद परेशान हैं। कई छात्रों को अचानक नंबर कम आने का डर सता रहा है, खास तौर पर उन छात्रों को जो JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। दिल्ली पेरेंट्स एसोसिएशन की प्रतिनिधि अपराजिता गौतम ने बताया कि इन सब वजहों से परिवारों में तनाव और निराशा का माहौल है।
अपराजिता गौतम ने जल्दबाजी में हुई OSM ट्रेनिंग की आलोचना की
गौतम ने बताया कि CBSE ने शिक्षकों को सही ट्रेनिंग दिए बिना ही OSM लागू कर दिया। उन्होंने कहा, "ट्रेनिंग बहुत जल्दबाजी में की गई और न ही बाद में उसकी कोई समीक्षा हुई। शिक्षकों को सैंपल पेपर पर लॉग-इन करके प्रैक्टिस करनी थी, लेकिन किसी ने यह जांचने की जहमत नहीं उठाई कि उन्होंने सच में ऐसा किया या नहीं। एक और बड़ी बात यह थी कि पेपर जांचने के लिए PGT शिक्षकों को लगाना था, लेकिन उनकी कमी के चलते TGT शिक्षकों को यह काम सौंपा गया। TGT शिक्षक आमतौर पर क्लास 10 तक पढ़ाते हैं, इसलिए हो सकता है कि उन्हें क्लास 12 के मार्किंग स्कीम की पूरी जानकारी न हो। यही वजह हो सकती है कि कुछ छात्रों के नंबर कम आए।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि कम अनुभवी शिक्षकों के शामिल होने से गलतियाँ होना स्वाभाविक है। करीब 6,50,000 आपत्तियां दर्ज की गई हैं, लेकिन चिंता यह है कि ग्रामीण इलाकों के कई छात्र तो अपनी समस्या शायद दर्ज ही न करा पाए हों।
सोशल मीडिया पर छात्र दोबारा मूल्यांकन की मांग कर रहे
सोशल मीडिया पर छात्रों के पोस्ट से हलचल मची हुई है, जिनमें वे गलत मूल्यांकन को लेकर शिकायतें कर रहे हैं। जैसे-जैसे और ज्यादा छात्र इस मुहिम से जुड़ रहे हैं, दोबारा मूल्यांकन की मांग भी जोर पकड़ रही है। सभी को उम्मीद है कि CBSE अपनी इस नई व्यवस्था की कमियों को जल्द दूर करेगा।