केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पेपर लीक संशोधन विधेयक को दी मंजूरी, क्या हैं प्रावधान?
क्या है खबर?
पेपर लीक विवाद और छात्रों के प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) और आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) की बैठक हुई। इसके बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल की भी अहम बैठक हुई। खबर है कि इसमें पेपर लीक से जुड़े संशोधित विधेयक पर चर्चा हुई और इसे मंजूरी भी दे दी गई। मानसून सत्र में विधेयक को पेश किया जा सकता है। आइए विधेयक के अहम प्रावधान जानते हैं।
सजा
दोषियों को मिलेगी 10 साल की सजा
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित विधेयक में पेपर लीक में दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों को 3 से 5 साल तक की जेल की सजा हो सकती है। साथ ही 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
वहीं, संगठित पेपर लीक रैकेट में शामिल लोगों को 5 से 10 साल की जेल और 10 करोड़ रुपये का जुर्माना हो सकता है।
साथ ही इन मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी, जो 3 महीने के भीतर फैसला सुनाएगी।
बयान
अश्विनी वैष्णव ने विधेयक से जुड़े सवालों का नहीं दिया जवाब
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए फैसलों पर प्रेस वार्ता की। हालांकि, उन्होंने पेपर लीक से जुड़े विधेयक को लेकर किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया।
जब पत्रकारों ने उनसे विधेयक से जुड़े सवाल पूछे तो उन्होंने केवल एक ही जवाब दिया- अगला सवाल।
उन्होंने एक के बाद एक कई पत्रकारों से सवाल लिए लेकिन अंत में विधेयक पर बिना कोई जवाब दिए चले गए।
प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने कहा था- सरकार लाएगी कानून
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आधी रात को छात्रों के लिए वीडियो संदेश जारी किया था।
इसमें उन्होंने कहा था, "पेपर लीक कोई मामूली विषय नहीं है। लाखों छात्रों, उनके माता-पिता के लिए पीड़ादायक है। इसलिए पिछले ढाई महीनों में कई कदम उठाए हैं। गुनहगारों को पकड़ा है, वे जेल में हैं। हमारी जिम्मेदारी थी कि छात्रों का साल बर्बाद न हो, इसलिए कम समय में 22 लाख छात्रों की परीक्षा कराई। 19 जुलाई को परिणाम भी आ गया।"
पिछला कानून
क्या है पेपर लीक से जुड़ा पिछला कानून?
दरअसल, फरवरी, 2024 में सरकार ने संसद से सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 पारित किया था। इसके मुताबिक, सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल के लिए दोषी को 3-5 साल की सजा और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
संगठित अपराध के मामलों में न्यूनतम एक करोड़ रुपये के जुर्माने के साथ 5-10 साल तक की कैद की सजा दी जाएगी।
फिलहाल इसी कानून को सख्त किया गया है।