विदेश मंत्री ने रूस से तेल खरीद का किया बचाव, कहा- इससे युद्ध खत्म नहीं होगा
क्या है खबर?
यूक्रेन दौरे पर गए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत द्वारा रूस से तेल खरीदी का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि रूस से भारत द्वारा तेल की खरीद कम करने से यूक्रेन युद्ध नहीं रुकेगा। उन्होंने पश्चिमी देशों के इस रुख का खंडन किया कि रूस की आर्थिक जीवनरेखा काटने से वह युद्ध खत्म करने पर मजबूर हो जाएगा। जयशंकर ने जोर दिया कि संघर्ष का समाधान केवल संवाद, कूटनीति और बातचीत से ही संभव है।
बयान
जयशंकर बोले- किसी के दबाव में नीतियां नहीं बदलेंगे
एक पत्रकार ने जयशंकर से पूछा कि अगर अमेरिका रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाता है, तो क्या भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा?
इस पर जयशंकर ने कहा, "सभी देशों को ये समझना होगा कि वैश्विक ऊर्जा संकट के दौर में 140 करोड़ आबादी वाले देश को ईंधन मुहैया कराना कितनी बड़ी चुनौती है। भारत अपनी जनता की जरूरतों को नजरअंदाज नहीं कर सकता और न ही किसी दबाव में नीतियां बदलेगा।"
तेल
आर्थिक पाबंदी से युद्ध खत्म नहीं किया जा सकता- जयशंकर
जयशंकर ने युद्ध को रोकने और शांति बहाल करने पर बड़ा बयान दिया।
उन्होंने कहा, "ये युद्ध जो आज 5वें साल में है, सिर्फ इसलिए खत्म नहीं होगा कि कोई देश रूस से तेल, धातु, खनिज या खाद खरीदे या न खरीदे। अगर कोई ये सोचता है कि आर्थिक पाबंदियां लगाकर या व्यापार को रोककर इस जंग को खत्म किया जा सकता है, तो ये उसकी सबसे बड़ी भूल है।"
आभार
जेलेंस्की ने जताया भारत का आभार
जयशंकर ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमीर जेलेंस्की से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच यूक्रेन युद्ध, खाद्य पदार्थों की आपूर्ति समेत कई अहम मुद्दों पर बात हुई।
इसके बाद यूक्रेनी राष्ट्रपति ने रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान रुख को लेकर भारत का आभार जताया।
उन्होंने कहा, "हम रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे इस अन्यायपूर्ण युद्ध को खत्म करने के भारत के संकल्प के लिए उनके आभारी हैं। यह निश्चित रूप से युद्ध का समय नहीं है।"
मध्यस्थता
भारत ने युद्ध में मध्यस्थता की पेशकश की
बीते दिन विदेश मंत्री ने अपने यूक्रेनी समकक्ष एंड्री सिबिहा से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने कहा था कि भारत यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने के प्रयासों में हर संभव तरीके से योगदान देने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा था, "अगर भारत किसी भी तरह से मदद कर सकता है, तो हम वहां मौजूद हैं।"
जयशंकर ने इस दौरान काला सागर में जहाजों पर हमले का मुद्दा भी उठाया था।