BRICS शिखर सम्मेलन: 'नई दिल्ली घोषणा पत्र' पर सहमति, टैरिफ और युद्ध की निंदा की गई
क्या है खबर?
भारत की अध्यक्षता में BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान एक बड़ी सफलता मिली है। समूह के सभी देशों ने संयुक्त घोषणा पत्र पर सहमति जताई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि घोषणा पर सर्वसम्मति से सहमति जताई गई। रिपोर्ट के मुताबिक, नई दिल्ली घोषणा में किसी भी देश का नाम लिए बिना सभी प्रकार की आक्रामकता की निंदा की गई है। युद्ध और मतभेदों के बीच इसे बड़ी सफलता माना जा रहा है।
घोषणा पत्र
संयुक्त घोषणा पत्र में क्या-क्या?
BRICS नई दिल्ली घोषणा पत्र में किसी देश का नाम लिए बिना हर तरह की आक्रामकता की निंदा की गई है, जो पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को देखते हुए बहुत महत्वपूर्ण है।
घोषणा पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि संघर्षों को खत्म करने के लिए बातचीत और कूटनीति ही आगे का रास्ता है।
समूह ने बातचीत और कूटनीति के जरिए अंतरराष्ट्रीय विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने के अपने संकल्प को दोहराया।
टैरिफ
घोषणा पत्र में एकतरफा टैरिफ पर जताई गई चिंता
संयुक्त घोषणा पत्र में एकतरफा टैरिफ और नॉन-टैरिफ उपायों के बढ़ते इस्तेमाल पर गंभीर चिंता जताई गई है, क्योंकि ये व्यापार को बिगाड़ते हैं और विश्व व्यापार संगठन के नियमों के खिलाफ हैं।
समूह ने एकतरफा दबाव डालने वाले उपायों की भी निंदा की और कहा कि ये अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हैं।
संयुक्त घोषणा पत्र में परमाणु खतरे और संघर्ष के बढ़ते जोखिमों पर भी चिंता जताई गई है।
बयान
प्रधानमंत्री बोले- BRICS किसी के खिलाफ नहीं
शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "BRICS किसी के विरुद्ध नहीं, बल्कि सबको साथ लेकर चलने की कोशिश करता है। भारत की BRICS अध्यक्षता लोगों पर केंद्रित और मानवता को प्राथमिकता देने वाले नजरिए से प्रेरित है। अगले 20 वर्षों के लिए हमें एक नए और महत्वाकांक्षी एजेंडे पर काम करना होगा।"
उन्होंने BRICS कम्युनिटी कंटीन्यूटी एंड इम्प्लीमेंटेशन मैकेनिज्म और नाविकों की सुरक्षा समेत कई प्रस्ताव भी रखे।
पहलगाम
देशों ने पहलगाम हमले की निंदा की
BRICS देशों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल, 2025 को हुए आतंकवादी हमले की निंदा की है।
समूह ने कहा, "हम आतंकवाद के सभी कृत्यों की कड़ी निंदा करते हैं, उन्हें आपराधिक और अनुचित मानते हैं, चाहे उनकी प्रेरणा कुछ भी हो, वे कभी भी, कहीं भी या किसी के द्वारा भी किए गए हों।"
घोषणा पत्र में आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही, वित्तपोषण और सुरक्षित ठिकानों सहित आतंकवाद से निपटने के लिए समूह की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
सफलता
संयुक्त घोषणा पत्र जारी होना कितनी बड़ी सफलता?
BRICS शेरपा शिखर सम्मेलन से पहले कई दिनों से मेहनत कर रहे थे, ताकि संयुक्त नेताओं की घोषणा के लिए आम सहमति बनाई जा सके।
भारत के करीबी सहयोगी ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच युद्ध के कारण पैदा हुए मतभेदों के चलते संयुक्त घोषणा पर आम सहमति बन पाने में मुश्किलें आ रही थीं।
इसी साल मई में जब BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक हुई थी, तब संयुक्त घोषणापत्र पर सहमति नहीं बन पाई थी।
मतभेद
ईरान-UAE में क्या थे मतभेद?
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान चाहता था कि BRICS अमेरिकी-इजरायली हमलों और पश्चिमी प्रतिबंधों की स्पष्ट रूप से निंदा करे, जबकि UAE चाहता था कि घोषणापत्र में खाड़ी क्षेत्र और सुविधाओं पर ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों को मान्यता दी जाए।
इसके बाद मतभेद सुलझाने के लिए भारतीय अधिकारियों ने रूस, ब्राजील और मिस्र के साथ मिलकर ईरानी और UAE प्रतिनिधियों के साथ अलग-अलग चर्चाएं की, ताकि दोनों पक्षों को स्वीकार्य भाषा पर सहमति बन सके।