बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: लोन वापस मांगना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं
बॉम्बे हाई कोर्ट ने साफ कर दिया है कि भारतीय कानून के तहत सिर्फ लोन वापस मांगना किसी को अपनी जान लेने के लिए उकसाना नहीं माना जा सकता। यह फैसला तब आया जब अदालत ने अमित मोर और 5 अन्य लोगों के खिलाफ केस हटा दिए, जिन पर आरोप था कि 2022 में कोल्हापुर में उन्होंने स्कूल शिक्षक दिलीप मांडे को आत्महत्या के लिए उकसाया था। जजों ने कहा कि आरोपियों की तरफ से जानबूझकर धक्का देने या किसी साजिश का कोई सबूत नहीं मिला।
कोई सबूत नहीं कि आरोपियों ने उकसाया- कोर्ट
मांडे ने पैसे उधार लिए थे और कहा जाता है कि आत्महत्या करने से पहले उन्हें पैसे वापस करने के लिए काफी दबाव डाला जा रहा था। उनके परिवार ने शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन अदालत को कोई ठोस सबूत नहीं मिला कि आरोपियों ने वाकई उन्हें उकसाया था। जस्टिस रणजितसिंहा राजा भोंसले की बेंच ने कहा कि लोन वापस मांगने या उसके लिए फॉलो-अप करने का काम सिर्फ एक मांग है। इसे किसी भी तरह से आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना जा सकता।