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CJI सूर्यकांत और बार काउंसिल प्रमुख की उपस्थिति से बवाल, NLSIU ने दीक्षांत समारोह रद्द किया 
CJI सूर्यकांत और बार काउंसिल प्रमुख की उपस्थिति को लेकर NLSIU ने दीक्षांत समारोह रद्द किया

CJI सूर्यकांत और बार काउंसिल प्रमुख की उपस्थिति से बवाल, NLSIU ने दीक्षांत समारोह रद्द किया 

लेखन गजेंद्र
Aug 27, 2026
02:45 pm

क्या है खबर?

कर्नाटक के बेंगलुरु में स्थित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) ने 2026 बैच के स्नातक होने वाले छात्रों के लिए अपना 34वां दीक्षांत समारोह रद्द कर दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने 27 अगस्त को बताया कि 'अपरिहार्य परिस्थितियों' से कोई दीक्षांत समारोह आयोजित नहीं किया जाएगा और छात्रों को उनकी डिग्री अनुपस्थिति में प्रदान की जाएगी। बता दें, समारोह में CJI सूर्यकांत और भारतीय बार काउंसिल के अध्यक्ष को बुलाया जाना था, जिसका छात्र विरोध कर रहे थे।

सूचना

विश्वविद्यालय प्रशासन ने क्या कहा?

विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों को बताया, "हमारे सामूहिक प्रयासों के बावजूद, अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण, हम 34वां वार्षिक दीक्षांत समारोह आयोजित करने में असमर्थ हैं। शासी निकायों से उचित अनुमोदन प्राप्त होने के बाद सभी स्नातक छात्रों को उनकी डिग्री अनुपस्थिति में प्रदान की जाएगी। छात्र अपने प्रमाणपत्र कूरियर द्वारा प्राप्त करने या परिसर से लेने का विकल्प चुन सकते हैं। विश्वविद्यालय सभी स्नातक छात्रों को नया फॉर्म और प्रक्रिया साझा करेगा ताकि वे अपनी पसंद का विकल्प चुन सकें।"

समारोह

CJI सूर्यकांत और बार काउंसिल के प्रमुख के आने से नाराज थे छात्र

NLSIU प्रशासन ने दीक्षांत समारोह तब रद्द किया है, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और भारतीय बार काउंसिल (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा की संभावित उपस्थिति को लेकर विवाद शुरू हो गया था।

NLSIU के 700 से अधिक छात्रों और पूर्व छात्रों ने CJI और मिश्रा के दीक्षांत समारोह में शामिल होने पर आपत्ति जताई थी।

CJI ने NLSIU के छात्रों की समस्याओं को समझने के लिए उनसे 90 मिनट लंबी बातचीत की थी।

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बवाल

NALSAR विश्वविद्यालय में भी हो चुका है विवाद

तेलंगाना के हैदराबाद स्थित नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (NALSAR) विश्वविद्यालय में भी दीक्षांत समारोह में CJI की उपस्थिति को लेकर विवाद हो चुका है।

छात्रों ने जंतर-मंतर प्रदर्शन पर CJI की टिप्पणी से खफा होकर उनका विरोध किया था। इसके बाद BCI प्रमुख मिश्रा ने छात्रों के बार पंजीयन पर रोक लगा दी। हालांकि, विवाद होने पर मिश्रा ने माफी मांफी और रोक हटा दी थी।

टाटा इंस्टीट्यूट में भी विवाद सामने आया था।

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