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टाटा इंस्टीट्यूट ने अंतिम समय में बदला अपना मुख्य अतिथि, CJI सूर्यकांत की जगह इनको बुलाया
टाटा इंस्टीट्यूट ने अंतिम समय में CJI सूर्यकांत की जगह टाटा मेमोरियल के निदेशक डॉ सीएस प्रमेश को मुख्य अतिथि बनाया

टाटा इंस्टीट्यूट ने अंतिम समय में बदला अपना मुख्य अतिथि, CJI सूर्यकांत की जगह इनको बुलाया

लेखन गजेंद्र
Aug 18, 2026
09:48 am

क्या है खबर?

महाराष्ट्र के मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) ने अंतिम समय में अपने 86वें दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि को बदल दिया है। इंस्टीट्यूट ने 2 अगस्त को होने वाले समारोह के लिए पहले भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाया था, लेकिन कार्यक्रम के 48 घंटे पहले उसे रद्द कर दिया। अब समारोह 22 अगस्त को होगा, जिसमें CJI की जगह टाटा मेमोरियल अस्पताल के निदेशक डॉ सीएस प्रमेश मुख्य अतिथि होंगे।

समारोह

इंस्टीट्यूट ने क्या बताकर बदला मुख्य अतिथि?

टाटा इंस्टीट्यूट ने एक ईमेल भेजकर बताया कि "अप्रत्याशित परिस्थितियों" के कारण दीक्षांत समारोह स्थगित कर दिया गया है। उसने कहा कि कार्यक्रम आयोजित करने के लिए अनुकूल वातावरण नहीं है।

बताया जा रहा है कि CJI की उपस्थिति दीक्षांत समारोह में निर्धारित थी, लेकिन प्रशासन ने कार्यक्रम को रद्द करना जरूरी समझा।

दीक्षांत समारोह शनिवार को देवनार स्थित संस्थान के नौरोजी परिसर में आयोजित किया जाएगा, जिसमें देशभर के परिसर से स्नातक छात्र शामिल होंगे।

चिंता

CJI की सुरक्षा का डर था

हैदराबाद की NALSAR विश्वविद्यालय में शुरू हुए विवाद के बाद TISS को भी कार्यक्रम के प्रभावित होने और CJI की सुरक्षा को लेकर डर था।

संस्थान से जुड़े सूत्रों का कहना है कि CJI के आने से छात्रों, फैकल्टी, कर्मचारियों और मेहमानों की सुरक्षा और सामान्य कैंपस गतिविधियां प्रभावित हो सकती थीं।

बता दें कि NALSAR विधि विश्वविद्यालय में 450 से अधिक स्नातक छात्रों ने CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाने पर विरोध शुरू किया था।

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विवाद

CJI की किस बात से NALSAR के छात्रों में विरोध?

NALSAR के छात्रों का विरोध CJI की 'कॉकरोच' वाली टिप्पणी और उसके बाद दिल्ली में 20 जुलाई को पुलिस के बर्बर हमले और सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के बाद सामने आया था।

दरअसल, 22 जुलाई को, एक वकील ने पुलिस बर्बरता से संबंधित याचिका पर CJI सूर्यकांत की पीठ के समक्ष तत्काल सुनवाई की मांग की।

CJI ने "हमारा और अपना समय बर्बाद न करें" और "हम कोई वीडियो नहीं देखना चाहते" टिप्पणी की, जिससे छात्र नाराज थे।

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