दिल्ली चुनाव: 33 लाख मतदाताओं पर संकट, तार्किक विसंगति वाले नोटिस पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
दिल्ली के चुनाव कार्यालय ने हाल ही में लगभग 33.1 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजे हैं। इनमें से करीब 19 लाख वोटरों को 'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसीज' यानी 'तार्किक विसंगतियों' के दायरे में रखा गया है। इस श्रेणी में अब छोटी-मोटी जानकारी की गलतियां से लेकर ज्यादा गंभीर मामले भी आ गए हैं। यह कदम सुप्रीम कोर्ट में होने वाली एक अहम सुनवाई से ठीक कुछ दिन पहले उठाया गया है। दरअसल, एक्टिविस्ट इस बात पर सफाई मांग रहे हैं कि आखिर इन लोगों को इस तरह से क्यों अलग किया जा रहा है।
'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसीज' में अब छोटी गलतियां भी शामिल
पहले इस 'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसीज' का मकसद अवैध प्रवासियों की पहचान करना था। लेकिन अब इसमें वोटर लिस्ट में छोटी-मोटी गलतियां भी शामिल कर ली गई हैं। इसी वजह से कई लोग परेशान और चिंतित हैं कि कहीं उन्हें वोटर लिस्ट से गलत तरीके से हटा न दिया जाए। इस पूरे मामले में पारदर्शिता की कमी पर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इसका सबसे ज़्यादा असर गरीब वोटरों पर पड़ सकता है। रावत ने कहा, "गरीबों के पास ही ऐसे कामों के लिए वक्त नहीं होता और सबसे ज़्यादा मार इन्हीं पर पड़ेगी।" इन नोटिसेस पर जवाब देने की आखिरी तारीख 29 अक्टूबर है। इसके बाद, वोटरों की अंतिम लिस्ट 4 नवंबर को जारी की जाएगी।