असम में UCC का काउंटडाउन शुरू, 8 सदस्यीय समिति का गठन
असम सरकार ने एक 8 सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति का काम यह पता लगाना है कि राज्य में नया समान नागरिक संहिता (UCC) किस तरह से लागू होगा या कैसे काम करेगा।
वरिष्ठ अधिकारी देबा प्रसाद मिश्रा इस समिति का नेतृत्व कर रहे हैं। इस टीम को UCC के नियम तैयार करने के लिए एक महीने का समय दिया गया है।
इस साल की शुरुआत में UCC बिल पास किया गया था। इसका मकसद शादी, तलाक, विरासत और लिव-इन रिलेशनशिप (साथ रहने वाले संबंध) जैसे मामलों में सभी धर्मों के लिए एक जैसे पर्सनल लॉ बनाना है। हालांकि, अनुसूचित जनजातियों (शेड्यूल्ड ट्राइब्स) को इससे छूट दी गई है।
बहुविवाह पर प्रतिबंध, लिव-इन संबंधों का पंजीकरण अनिवार्य
इस UCC में बहुविवाह (एक से ज्यादा शादी) पर पूरी तरह से रोक लगाई गई है। साथ ही, लिव-इन रिलेशनशिप (बिना शादी के साथ रहने वाले संबंध) का रजिस्ट्रेशन कराना भी अनिवार्य होगा।
अगर कोई इसका पालन नहीं करता, तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा। असम सरकार ये बदलाव करके उत्तराखंड और गुजरात जैसे राज्यों की राह पर चल रही है।
इस मसौदा समिति की अध्यक्षता गृह और राजनीतिक विभाग के सचिव देबा प्रसाद मिश्रा कर रहे हैं। इस समिति में वित्त विशेष आयुक्त और सचिव पार्थ प्रतिम मजूमदार, विधायी सचिव गीतांजलि डी सैकिया, अल्पसंख्यक कल्याण और विकास सचिव फरीदा शमसुल, और गृह और राजनीतिक अतिरिक्त सचिव मृदुल कुमार दास जैसे वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। यह दिखाता है कि राज्य में इस बड़े बदलाव को लाने के लिए एक गंभीर और अनुभवी टीम काम कर रही है।