भारत की बिजली में फिर कोयले का बोलबाला, अल नीनो से बढ़ी मांग
भारत में अक्टूबर में कोयले से बिजली का उत्पादन 25.7 प्रतिशत बढ़ गया, जो पिछले 3 सालों में सबसे तेजी से हुई बढ़ोतरी है। अब देश की कुल बिजली में कोयले की हिस्सेदारी 71.7 प्रतिशत हो गई है, जो सितंबर के मुकाबले काफी ज्यादा है।
दरअसल, अल नीनो मौसम पैटर्न के कारण बारिश कम हुई, जिससे जलविद्युत का उत्पादन तेजी से घट गया। कम बारिश के कारण जब जलविद्युत से बिजली बनाना मुश्किल हुआ, तो देश ने घरों को रोशन रखने और फैक्ट्रियों को चलाने के लिए कोयले का भरपूर इस्तेमाल किया।
भारत ने कोयले की आपूर्ति तेज की
कोयले से बिजली उत्पादन में यह उछाल तब आया जब उद्योगों को ज्यादा बिजली की जरूरत पड़ी। इस कारण भारत के आधे से ज्यादा कोयला प्लांट में ईंधन का भंडार कम हो गया। बिजली कटौती से बचने के लिए सरकार ने तुरंत अतिरिक्त कोयले की सप्लाई सुनिश्चित की।
अच्छी बात यह है कि नवीकरणीय ऊर्जा में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। सौर ऊर्जा 62 प्रतिशत बढ़ गई, जिससे कुल रिन्यूएबल एनर्जी में 34.7 प्रतिशत का उछाल आया। लेकिन, कुल बिजली की खपत इतनी ज्यादा थी कि सितंबर में स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी 17 प्रतिशत थी जो अक्टूबर में घटकर करीब 15 प्रतिशत रह गई।