POCSO पीड़ितों के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, अब बिना चोट के भी मिलेगा मुआवजा
इलाहाबाद हाईकोर्ट से एक अहम खबर सामने आई है। अब POCSO एक्ट के तहत बाल यौन शोषण के शिकार हुए लोगों को मुआवजा मिल सकेगा, भले ही उनके शरीर पर कोई चोट के निशान न दिखें।
हाल ही में, अदालत ने राज्य की 'रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान कोष' योजना के तहत एक नाबालिग पीड़ित को 3 लाख रुपये देने का निर्देश दिया है। इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि पीड़ितों को सहायता देने के लिए केवल मेडिकल सबूत ही काफी नहीं होते।
हाई कोर्ट ने कहा- पुलिस रिपोर्ट ही मानी जाएगी सबूत
यह मामला दिसंबर 2022 में दर्ज हुई एक FIR से जुड़ा है। पहले अधिकारियों ने पीड़ित को मुआवजा देने से इनकार कर दिया था, क्योंकि यौन उत्पीड़न का कोई मेडिकल प्रमाण नहीं मिल पाया था।
लेकिन कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए साफ कहा कि POCSO के तहत हमले को साबित करने के लिए शारीरिक चोटें होना जरूरी नहीं है। अगर पुलिस रिपोर्ट और चार्जशीट पीड़ित की बात को सही ठहराती हैं, तो मुआवजा मिलना ही चाहिए। क्योंकि ये योजनाएं लोगों को मानसिक और शारीरिक रूप से ठीक होने में सहायता देने के लिए बनी हैं, न कि केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए।