इलाहाबाद हाई कोर्ट का दो टूक: पहली शादी छिपाकर की दूसरी तो भी पत्नी को मिलेगा गुजारा भत्ता
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक बड़ा और साफ फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा है कि अगर कोई शख्स अपनी पहली शादी छिपाकर किसी महिला से धोखे से शादी करता है, तो भले ही यह दूसरी शादी कानून की नजर में सही न मानी जाए, फिर भी वह महिला गुजारा भत्ता (मेंटेनेंस) पाने की हकदार है।
अदालत ने पति को उसकी इस धोखाधड़ी के लिए जिम्मेदार ठहराया। कोर्ट ने साफ कहा कि वह अपनी ही गलती का बहाना बनाकर पत्नी को मेंटेनेंस देने से पीछे नहीं हट सकता।
अदालत ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए CrPC की धारा 125 पर जोर दिया
इस मामले में, जोड़े ने साल 2016 में शादी की थी, जबकि पति की पहली शादी साल 2017 के आखिर में जाकर खत्म हुई।
महिला को अभी तक हर महीने 6,000 रुपये मिलते थे, लेकिन उसने इस रकम को बढ़ाने की मांग की। ऐसा इसलिए क्योंकि पति एक सरकारी कर्मचारी है और उसकी मासिक आय करीब 50,000 रुपये है।
अदालत ने साफ किया कि CrPC की धारा 125 का मुख्य उद्देश्य ऐसी मुश्किल स्थितियों में महिलाओं को किसी भी तरह के शोषण से बचाना है, इसलिए इसका उपयोग उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ही किया जाना चाहिए।