इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सहमति वाले रिश्ते में सिर्फ वादा टूटना बलात्कार नहीं
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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक व्यक्ति पर लगे बलात्कार के आरोप हटा दिए हैं। उस पर अपनी प्रेमिका से शादी न करने का आरोप था, जबकि दोनों 2 साल तक सहमति से रिश्ते में थे। जज ने इस मामले पर कहा कि अगर कोई व्यक्ति ईमानदारी से शादी का वादा करता है, लेकिन बाद में कुछ कारणों से रिश्ता टूट जाता है, तो यह अपने आप में धोखाधड़ी या आपराधिक मामला नहीं बन जाता, जब तक कि शुरुआत से ही उसका इरादा छल करने का न रहा हो।
अदालत को अपराध का कोई सबूत नहीं मिला
अदालत ने इस बात पर गौर किया कि मामले में ब्लैकमेल या शारीरिक चोट का कोई निशान नहीं था। साथ ही, कथित अश्लील वीडियो भी नहीं मिल पाया। चूंकि महिला ने शिकायत काफी देरी से की थी और वह अपनी मर्जी से इस रिश्ते में शामिल थी, इसलिए अदालत ने यह माना कि यह एक असफल रिश्ता था, न कि कोई अपराध। यह फैसला भविष्य में ऐसे ही मामलों पर असर डाल सकता है।