13 साल से जेल में बंद, मिली फांसी की सजा; अब कोर्ट ने क्यों कर दिया बरी?
सुप्रीम कोर्ट ने 13 साल तक मौत की सजा का इंतजार कर रहे मेहताब की फांसी की सजा पलट दी है और उसे चर्चित बलात्कार और हत्या के मामले से बरी कर दिया है। जजों का कहना था कि उसे जेल में रखने लायक पुख्ता सबूत मौजूद नहीं थे। अदालत ने यह भी बताया कि मेहताब की मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक, वह शारीरिक संबंध बनाने में सक्षम नहीं था। इससे उस पर लगा बलात्कार का आरोप बेबुनियाद साबित हुआ। इसी केस में एक और आरोपी को भी बरी किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों के पहले के फैसलों को पलट दिया है।
मेडिकल गवाही बनी मुख्य वजह, बलात्कार का आरोप हुआ कमजोर
इस पूरे मामले में मेडिकल गवाही ही सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बनी। इसी गवाही से साफ हुआ कि मेहताब शारीरिक संबंध बनाने में सक्षम नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि उन्होंने अभियोजन पक्ष (प्रॉसिक्यूशन) के तर्कों में मौजूद बड़ी कमियों और विरोधाभासों को अनदेखा कर दिया था। जजों ने अपने फैसले में साफ कहा कि अभियोजन पक्ष का पक्ष "भरोसा जगाने वाला नहीं" था। इसी आधार पर दोनों आरोपियों को बरी कर दिया गया।