तेलंगाना की जाति जनगणना का खुलासा: 89,000 बच्चे मजदूर, जाति के दलदल में फंसा बचपन
तेलंगाना सरकार की हाल ही में हुई एक जाति जनगणना में यह खुलासा हुआ है कि पूरे राज्य में 18 साल से कम उम्र के 89,000 बच्चे दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम कर रहे हैं। ये आंकड़े 3.5 करोड़ से ज़्यादा लोगों की बड़ी जनगणना का हिस्सा हैं। इनसे पता चलता है कि आर्थिक तंगी और शिक्षा तक पहुंच न होने के कारण कई बच्चे, खासकर वंचित समुदायों से, स्कूल जाने के बजाय काम करने को मजबूर हैं।
तेलंगाना में जाति के आधार पर बाल मजदूरी का अंतर
आंकड़े बताते हैं कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के बच्चों में बाल मजदूरी सबसे अधिक है। इनमें 14% बाल मजदूर अनुसूचित जाति के मदिगा समुदाय से हैं और 11% अनुसूचित जनजाति के लाम्बाडी समुदाय से। वहीं सामान्य (ओ सी) ब्राह्मणों में केवल 2.6% लोग ही इस तरह के काम करते हैं। इसके उलट, सामान्य (ओ सी) राजू और ब्राह्मण जैसे समूह पेशेवर नौकरियों में सबसे आगे हैं, जिनकी कुल नौकरियों में 27% हिस्सेदारी है। यह कड़वी सच्चाई है कि तेलंगाना में आज भी किसी व्यक्ति के आर्थिक अवसर काफी हद तक उसकी जन्म के साथ मिली जाति पर निर्भर करते हैं।