गुजरात में 62 एशियाई शेरों की बीमारी से मौत, सरकार की बढ़ी चिंता
गुजरात में अगस्त 2025 से जुलाई 2026 के बीच कुल 62 एशियाई शेरों की मौत हो चुकी है। मरने वाले इन शेरों में 17 नर, 17 मादा और 28 शावक थे। इन सभी की मौत अलग-अलग बीमारियों की वजह से हुई। वन और पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने विधानसभा में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस इलाके के शेरों के लिए बीमारियां अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
गुजरात सरकार ने शेरों के स्वास्थ्य के लिए उपाय बढ़ाए
शेरों के पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से सामने आया कि कई शेरों की मौत की वजह सेप्टीसीमिया (खून का संक्रमण), निमोनिया, किडनी फेलियर और राउंडवॉर्म (पेट के कीड़े) का इन्फेक्शन जैसी समस्याएं थीं। इन दुर्लभ शेरों को बचाने के लिए सरकार ने कई उपाय किए हैं। अब शेरों के खून के नमूने लेकर लैब में जांच के लिए भेजे जाते हैं। इसके साथ ही, उनकी डीवर्मिंग (पेट के कीड़े निकालने) की जा रही है और शरीर से किलनी भी हटाई जा रही है। शेरों के रहने वाले इलाकों के पास के मवेशियों का टीकाकरण भी किया जा रहा है। अधिकारी शेरों की हरकतों पर भी लगातार नजर रख रहे हैं, ताकि उनके संरक्षण के काम को और मजबूती मिले। यह कदम इसलिए भी बहुत जरूरी है, क्योंकि पिछले साल की जनगणना के हिसाब से अब सिर्फ 891 शेर ही बचे हैं।