'तेरे इश्क में' बनी बॉक्स ऑफिस की सिकंदर, 'गुस्ताख इश्क' का पहले ही दिन काम-तमाम
क्या है खबर?
पहली ही सुबह से बॉक्स ऑफिस कलेक्शन को लेकर चर्चाएं तेज थीं। दोनों तरफ से जबरदस्त प्रचार, कलाकारों की फैन फॉलोइंग, पर असली परीक्षा तो पहले दिन ही होती है। जब धनुष की फिल्म 'तेरे इश्क में' और विजय वर्मा की 'गुस्ताख इश्क' एक ही दिन आमने-सामने उतरीं तो सवाल सिर्फ एक था कि आखिर किसने मारी बड़ी बाज़ी? इस सवाल का जवाब मिल चुका है, क्योंकि दोनों फिल्मों के पहले दिन के बॉक्स ऑफिस आंकडे सामने आ चुके हैं।
जबरदस्त शुरुआत
'तेरे इश्क में' ने आते ही किया बॉक्स ऑफिस पर कब्जा
'तेरे इश्क में' ने रिलीज के साथ ही बॉक्स ऑफिस पर धुआंधार शुरुआत की है। आनंद एल राय के निर्देशन में बनी इस रोमांटिक ड्रामा फिल्म को दर्शकों से शानदार प्रतिकिया मिल रही है, जिसकी झलक इसके पहले दिन के कारोबार में साफ दिखती है। सैकनिल्क के मुताबिक, फिल्म ने 16.5 करोड़ रुपये के साथ अपना खाता खोला और इसी के साथ ये 'सैयारा' के बाद इस साल की दूसरी सबसे ज्यादा ओपनिंग लेने वाली रोमांटिक फिल्म बन गई।
कहानी
फिल्म की कहानी जानिए
फिल्म की कहानी एक गुस्सैल और बेपरवाह युवक (धनुष) से शुरू होती है, जिसकी जिंदगी तब बदलने लगती है, जब उसे कॉलेज में पढ़ने वाली मुक्ति (कृति सैनन) से प्यार हो जाता है। दोनों का रोमांस धीरे-धीरे गहराता है, लेकिन अचानक मोड़ तब आता है, जब मुक्ति उससे दूरी बना लेती है और किसी और शख्स से शादी करने का फैसला कर लेती है। यहीं से कहानी पलटती है और फिर शुरू होता है जबरदस्त ड्रामा।
गुस्ताख इश्क
'गुस्ताख इश्क' तो बुरी तरह पिटी
28 नवंबर को 'तेरे इश्क में' के साथ सिनेमाघरों में आई रोमांटिक फिल्म 'गुस्ताख इश्क' को भी दर्शकों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली, वहीं बॉक्स ऑफिस पर इसने पहले ही दिन दम तोड़ दिया। बड़ी मुश्किल से इसकी लाखों में कमाई हो पाई है। फिल्म ने पहले दिन महज 50 लाख रुपये कमाए हैं। ये कहना गलत नहीं होगा कि इसे 'तेरे इश्क में' से टकराने का बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ा है। उम्मीद है कि वीकेंड में इसकी कमाई बढ़ जाए।
स्टारकास्ट
'गुस्ताख इश्क' के किरदार और कहानी
'गुस्ताख इश्क' में विजय वर्मा, फातिमा सना शेख, नसीरुद्दीन शाह और शारिब हाशमी अहम भूमिका में हैं। फिल्म के निर्देशक विभु पुरी हैं। इससे फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा ने बतौर निर्माता अपनी शुरुआत की है। फिल्म विजय के किरदार के आसपास घूमती है, जो पुरानी दिल्ली के बीचों-बीच स्थित अपने पिता के प्रिंटिंग प्रेस को बचाने की कोशिश कर रहा है। इसी बीच वो नसीरुद्दीन के किरदार का शिष्य बन जाता है और उसकी बेटी से प्यार करने लगता है।