शबाना आजमी आइटम गानों पर बोलीं- नियंत्रण खोकर पुरुषों के आगे समर्पण कर देती हैं महिलाएं
क्या है खबर?
दिग्गज अभिनेत्री शबाना आजमी अपनी बेबाकी के लिए जानी जाती हैं और इस बार उन्होंने फिल्मों में आइटम गानों की संस्कृति पर तीखा प्रहार किया है। शबाना ने फिल्मों में महिलाओं के चित्रण पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसे गानों में एक महिला अपनी गरिमा और नियंत्रण खो देती है और पूरी तरह से पुरुषों की नजरों के सामने समर्पण कर देती है। क्या कुछ बोलीं शबाना, आइए जानते हैं।
टिप्पणी
महिलाओं के चित्रण पर शबाना की तीखी टिप्पणी
मुंबई में आयोजित 'वी द वुमेन' कार्यक्रम में 75 वर्षीय अभिनेत्री ने साफ शब्दों में कहा कि आइटम गानों में जिस तरह का चित्रण किया जाता है, वो महिलाओं को केवल शरीर के अंगों तक सीमित कर देता है। शबाना बोलीं, "सब कुछ कैमरे के नजरिए पर निर्भर करता है। जब कैमरा केवल शरीर के विशिष्ट हिस्सों (जैसे हिलती हुई नाभि या क्लीवेज) पर ध्यान केंद्रित करता है तो वो कलाकार की कला नहीं, बल्कि वासना को बढ़ावा देता है।
दो टूक
"आइटम गानों में महिला अपना नियंत्रण खो देती है"
शबाना ने कहा, "मुझे ऐसा लगता है कि एक 'आइटम नंबर' के दौरान महिला अपना सारा नियंत्रण खो देती है और पूरी तरह से पुरुषों की कामुक नजरों के सामने आत्मसमर्पण कर देती है।" शबाना ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बताया कि उन्हें ये पूरी अवधारणा बेहद परेशान करने वाली लगती है, खासकर तब जब इन गानों का फिल्म की मुख्य कहानी या पटकथा से कोई लेना-देना नहीं होता।
समस्या
शबाना आज़मी ने उठाई मसाला गानों पर चिंता
शबाना बोलीं, "मुझे इससे बड़ी समस्या है, क्योंकि ज्यादातर समय इन गानों का फिल्म की कहानी से कोई लेना-देना नहीं होता। ये जैसे 'मसाला' डाल दिए जाते हैं। सबसे ज्यादा परेशान करती है समाज की प्रतिक्रिया। शादियों या कार्यक्रमों में छोटे बच्चे 'चोली के पीछे क्या है' जैसे गाने गा रहे होते हैं और हर कोई हंस रहा होता है। कोई गानों के शब्दों पर ध्यान नहीं देता, बस मजे में डूबे रहते हैं।"
सफरनामा
अभिनय से समाज तक, शबाना का शानदार सफरनामा
दशकों से शबाना आजमी न केवल अपनी अदाकारी, बल्कि महिला अधिकारों और हाशिए पर खड़े समुदायों के हक में आवाज उठाने के लिए जानी जाती हैं। भारतीय सिनेमा के इतिहास में वह सबसे सम्मानित अभिनेत्रियों में से एक हैं। शबाना बॉलीवुड की इकलौती अभिनेत्री हैं, जिन्होंने 5 बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता है। वो केवल एक अभिनेत्री नहीं, बल्कि एक सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं, जो सिनेमा के माध्यम से समाज को आईना दिखाने का साहस रखती हैं।