
सत्यजीत रे की फिल्मों का हुआ नवीनीकरण, जल्द दर्शकों के लिए होंगी उपलब्ध
क्या है खबर?
आज के दौर में पैन इंडिया फिल्में, VFX से भरपूर फिल्में और 3D, IMAX जैसी फिल्मों का प्रचलन है। आज के फिल्म निर्माताओं के लिए राह बनाने का श्रेय फिल्ममेकर सत्यजीत रे को जाता है।
यह रे का हुनर था कि उनकी दशकों पुरानी फिल्में आज भी समाज और भावनाओं के करीब लगती हैं।
नई जानकारी के मुताबिक रे की फिल्मों का नवीनीकरण कर लिया गया है और जल्द ही ये दर्शकों के लिए उपलब्ध हो सकती हैं।
खबर
दुनियाभर के दर्शकों के लिए उपलब्ध होंगी फिल्में
मीडिया से बातचीत में उनके बेटे संदीप रे ने बताया कि उनकी ब्लैक एंड वाइट फिल्मों को दुरुस्त कर लिया गया है। फिलहाल उनकी फिल्म 'कंचनजंगा' के नवीनीकरण पर काम चल रहा है। जल्द ही इन फिल्मों को दुनियाभर के दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।
संदीप ने कहा, "महामारी के कारण 2021 में हम उनकी 100वीं जयंती अच्छे से नहीं मना पाए थे। अब उनकी फिल्मों के साथ एक भव्य कार्यक्रम करने की योजना है।"
मौजूदा स्थिति
कैसी है प्रिंट की मौजूदा स्थिति?
रे की फिल्मों के प्रिंट, स्क्रिप्ट और अन्य दस्तावेजों की मौजूदा स्थिति के बारे में संदीप का कहना है कि वे इस बात का ध्यान रख रहे हैं कि वे और खराब न हों।उनकी शुरुआति फिल्मों के प्रिंट समय के साथ खराब हो गए हैं।
बहुत सी फिल्मों के प्रिंट का उनकी संस्था ने नवीनीकरण करके उन्हें डिजिटल कर दिया है।
ऐसे में दर्शकों को 'पाथेर पांचाली', 'चारुलता' जैसी सदाबहार फिल्में फिर से देखने को मिल सकती हैं।
फेलूदा
रे के इस किरदार पर बन रही वेब सीरीज
सत्यजीत रे द्वारा गढ़े गए किरदार 'फेलूदा' पर जल्द ही वेब सीरीज बनने जा रही है।
यह सत्यजीत रे का रोचक जासूस किरदार है। श्रीजित मुखर्जी और अरिंदम सिल इस सीरीज का निर्देशन करेंगे।
संदीप को निर्देशकों पर पूरा भरोसा है। उनके अनुसार, OTT के लिए रचनात्मक स्वतंत्रता ली जा सकती है, लेकिन किरदार का मूल भाव बना रहे।
रे के किरदार प्रोफेसर शोंकू पर भी फिल्म बनाने की योजना है।
परिचय
भारतीय सिनेमा को पटरी पर लाने वाले निर्देशक थे सत्यजीत रे
सत्यजीत रे एक जाने-माने लेखक, पब्लिशर, इलस्ट्रेटर, ग्राफिक डिजाइनर और फिल्म क्रिटिक थे।
उनकी पहली फिल्म थी 'पाथेर पांचाली', जिसने कई पुरस्कार अपने नाम किए।
कहा जाता है कि सत्यजीत रे ने ही घुटनों पर चल रहे भारत के सिनेमा को चलना सिखाया। उन्होंने ज्यादा सिनेमा बांग्ला में ही बनाया। हिंदी में उन्होंने 'शतरंज के खिलाड़ी' जैसी फिल्म बनाई, जो हिंदी सिनेमा की यादगार फिल्म है। सत्यजीत रे को भारतीय सिनेमा का सबसे बेहतर निर्देशक माना जाता है।