'सतलुज' से पहले भी विवादों के जाल में फंस चुकीं दिलजीत दोसांझ की ये फिल्में
क्या है खबर?
दिलजीत दोसांझ पिछले कुछ दिनों से फिल्म 'सतलुज' को लेकर सुर्खियों में हैं। उनकी ये फिल्म रिलीज के 48 घंटे बाद ही भारत में OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 से हटा दी गई। भले ही आज 'सतलुज' जैसी फिल्मों को लेकर चर्चा तेज हो, लेकिन ये कोई पहली बार नहीं है, जब अभिनेता की फिल्म तीखे विवादों की चपेट में आई हो। आइए जानते हैं दिलजीत की फिल्मों के साथ विवादों का ये सिलसिला आखिर क्यों और कैसे चलता आ रहा है।
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'सरदार जी 3'
'सतलुज' से पहले दिलजीत की 'सरदार जी 3' भी गलत वजहों से सुर्खियों में आई थी। ये विवाद तब भड़का, जब इस फिल्म में दिलजीत के साथ पाकिस्तानी अभिनेत्री हानिया आमिर को लिया गया। अप्रैल, 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया था, जिसके चलते कई फिल्म इंडस्ट्री संगठनों और सोशल मीडिया यूजर्स ने इस फिल्म में एक पाकिस्तानी कलाकार को शामिल किए जाने पर कड़ा विरोध जताया था।
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'अमर सिंह चमकीला'
साल 2024 में आई इम्तियाज अली की फिल्म 'अमर सिंह चमकीला' ने चमकीला की विरासत को लेकर पुरानी बहसों को फिर जिंदा कर दिया। इसके अलावा फिल्म में दिलजीत के लुक को लेकर ये विवाद खड़ा हो गया कि क्या उन्होंने इस किरदार के लिए अपने बाल कटवाए हैं। हालांकि, निर्देशक ने बाद में साफ किया कि दिलजीत ने अपने बाल नहीं कटवाए, बल्कि पूरी ईमानदारी और सम्मान के साथ चमकीला जैसा दिखने के लिए केवल विग का इस्तेमाल किया।
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'पंजाब 1984'
साल 2014 में रिलीज हुई 'पंजाब 1984' दिलजीत के करियर की सबसे दमदार फिल्मों में से एक है, जिसमें उनके अभिनय को खूब सराहा गया। अनुराग सिंह निर्देशित ये फिल्म पंजाब में उग्रवाद के दौर की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिसमें एक लापता युवक और उसे खोजती उसकी मां की मार्मिक कहानी दिखाई गई है। संवेदनशील विषय, उग्रवाद काल के चित्रण और कथित मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर फिल्म ने रिलीज के बाद काफी विवाद और बहस भी बटोरी।
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'सतलुज'
दिलजीत की 'सतलुज' को ZEE5 से हटाए जाने पर विवाद हो गया। राजनीतिक दबाव की अटकलों के बीच सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि फिल्म को CBFC की मंजूरी नहीं मिली थी। जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित ये फिल्म पंजाब उग्रवाद के दौरान अवैध अंतिम संस्कारों के खुलासे को दिखाती है। CBFC द्वारा सुझाए गए बड़े कट्स निर्माताओं ने स्वीकार नहीं किए, जिसके चलते फिल्म 3 साल से अधिक समय तक सेंसरशिप विवाद में उलझी रही।