एस जानकी ने जब कहा- 40 हजार गानों के बाद पद्म भूषण नहीं, भारत रत्न मिलना चाहिए था
साल 2013 में मशहूर गायिका एस जानकी ने पद्म भूषण सम्मान लेने से विनम्रतापूर्वक मना करके खूब सुर्खियां बटोरीं। उनका कहना था कि यह सम्मान उनके लिए बहुत देर से आया है और उनके जीवनभर के योगदान के लिए भारत रत्न ही सही सम्मान होता। अपने 55 साल के लंबे करियर में उन्होंने 17 भाषाओं में 40,000 से ज्यादा गाने गाए थे। जानकी का मानना था कि कलाकार को असली पहचान तब मिलनी चाहिए, जब वह इसे महसूस करने और सराहने के लिए जीवित हो।
'जीते जी क्यों नहीं मिलता सम्मान?'
लगभग 75 साल की उम्र में जानकी ने द हिंदू अखबार को दिए एक इंटरव्यू में साफ कहा था कि कलाकारों को समय रहते सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया था, "सरकार लोगों के योगदान को तब क्यों नहीं पहचान सकती जब वे जीवित और सक्रिय हों?" इसके साथ ही उन्होंने दक्षिण भारत की प्रतिभाओं को और ज्यादा सम्मान दिए जाने की बात भी कही थी। साल 2013 की इस घटना को आज 13 साल बीत चुके हैं, लेकिन कला के क्षेत्र में सही समय पर और निष्पक्ष पहचान को लेकर उनकी कही बातें आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं और लोगों को प्रेरित करती हैं।