रणबीर पर हावी हुआ 'राम' बनने का डर, बोले- घबराहट ने बुरी तरह घेर लिया था
क्या है खबर?
फिल्म 'रामायण: पार्ट 1' के दुनियाभर में रिलीज होते ही रणबीर कपूर ने 'भगवान राम' का किरदार निभाने की चुनौतियों पर खुलकर बात की। रणबीर ने स्वीकार किया कि पर्दे पर ईश्वर का रोल निभाते समय रचनात्मक आजादी की गुंजाइश बहुत कम होती है। अभिनेता ने बताया कि इस ऐतिहासिक भूमिका को निभाने से पहले उन्हें अपने अंदर के डर, आशंकाओं और असुरक्षा की भावना पर काबू पाना पड़ा था।
जिम्मेदारी
पौराणिक किरदारों की जिम्मेदारी पर बोले रणबीर
BBC एशियन नेटवर्क से रणबीर ने करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े किरदारों को पर्दे पर निभाने की जिम्मेदारी पर कहा, "आधुनिक या काल्पनिक फिल्मों की तुलना में पौराणिक ग्रंथों पर आधारित फिल्मों में काम करना बिल्कुल अलग होता है। उन्होंने कहा कि काल्पनिक किरदारों में अपनी मर्जी से छूट ली जा सकती है, लेकिन हजारों साल पुराने धार्मिक ग्रंथों के किरदारों को निभाते समय मूल रचना के प्रति पूरी तरह वफादार और सच्चा रहना पड़ता है।"
डर
अंदर के डर और आशंकाओं की आवाज को दबाना पड़ता है- रणबीर
रणबीर बोले कि 'एनिमल' या 'ब्रह्मास्त्र' जैसी फिल्मों में काम करते समय एक कलाकार के पास रचनात्मक आजादी होती है, लेकिन 'रामायण' हजारों साल पुराना ग्रंथ है, इसलिए मूल कहानी से बंधे रहना जरूरी था।
उन्होंने माना कि सबसे बड़ी चुनौती लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचने और विभिन्न समुदायों की उम्मीदों पर खरा न उतरने के लगातार बने रहने वाले डर को दिमाग से बाहर निकालना था। आपको अपने अंदर से उठने वाले डर को दबाना पड़ता है।
किरदार
"भगवान का रोल निभाते ही चाल-ढाल का डर सताने लगता है"
रणबीर ने बताया कि किसी समुदाय को खुश करने या न कर पाने के ख्याल काम के दौरान दिमाग में आ सकते हैं, लेकिन कलाकार को केवल कहानी पर भरोसा रखना चाहिए, उसके प्रति समर्पण दिखाना चाहिए और अपनी एक्टिंग को बिल्कुल सहज रखना चाहिए।
रणबीर ने आगे कहा, "जब आपको पता होता है कि आप पर्दे पर किसी भगवान का रोल निभा रहे हैं तो लोग आपसे एक खास तरह के हाव-भाव और चाल-ढाल की उम्मीद करते हैं।
शक
शुरुआत में डर और शक ने पूरी तरह घेर लिया था
रणबीर ने बातचीत में कहा, "आप अचानक सचेत हो जाते हैं कि आप कैसे दिख रहे हैं, कैसे चल रहे हैं और खुद को कैसे पेश कर रहे हैं। इस चक्कर में आप खुद को जरूरत से ज्यादा गंभीरता से लेना शुरू कर देते हैं।"
जब रणबीर से पूछा गया कि 'भगवान राम' जैसे आदर्श किरदार के लिए क्या उन्हें खुद पर शक हुआ तो उन्होंने माना कि शुरुआत में आत्म-संदेह और डर ने उन्हें पूरी तरह घेर लिया था।
अवसर
"पता था जिंदगी में यह मौका बार-बार नहीं मिलेगा"
रणबीर बोले, "मैं डर से भर गया था। मुझे लगता था कि कहीं मैं इस रोल के लिए ज्यादा उम्रदराज तो नहीं? क्या मैं इसके साथ न्याय कर पाऊंगा? मेरे मन में खुद को लेकर कई तरह की असुरक्षाएं और सवाल थे, लेकिन यह मौका मेरे ठीक सामने था और मैं जानता था कि ये जिंदगी में एक ही बार मिलने वाला मौका है। मैं इस बात से भी भली-भांति वाकिफ था कि इस पर लोगों की कैसी प्रतिक्रियाएं आएंगी।"