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दिलजीत की 'सतलुज' को ZEE5 पर वापस लाने की मांग, पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में PIL दायर
'सतलुज' को ZEE5 पर वापस लाने के लिए जनहित याचिका दायर

दिलजीत की 'सतलुज' को ZEE5 पर वापस लाने की मांग, पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में PIL दायर

Jul 09, 2026
07:20 pm

क्या है खबर?

मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित और दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म 'सतलुज' को OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 पर दोबारा बहाल करने की मांग को लेकर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। इस फिल्म को रिलीज के महज 48 घंटे के भीतर ही प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया था। याचिकाकर्ता का आरोप है कि किसी फिल्म को इस तरह अचानक हटाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सीधा उल्लंघन है।

जंग

अब हाई कोर्ट पहुंची फिल्म के निर्माताओं की लड़ाई

पंजाबी गायक-अभिनेता दिलजीत अभिनीत फिल्म 'सतलुज' को ZEE5 पर वापस लाने की मांग को लेकर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित इस फिल्म को रिलीज के महज 2 दिन बाद ही हटा दिया गया था। इससे पहले, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) द्वारा बिना बदलावों के मंजूरी न देने के कारण ये फिल्म 3 साल तक अटकी रही थी।

मांग

अभिव्यक्ति की आजादी का हनन- सब्सक्राइबर

ZEE5 से हटाए जाने के बाद से ही फिल्म लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। यहां तक कि केंद्र सरकार ने भी इसकी सामग्री की समीक्षा के लिए एक पैनल का गठन किया है। इस बीच पंजाब के निवासी और ZEE5 सब्सक्राइबर शरवन सिंह ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर फिल्म को वापस प्लेटफॉर्म पर लाने की मांग की है। उनका तर्क है कि फिल्म को हटाने से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का हनन हो रहा है।

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सवाल

'सतलुज' को हटाने के खिलाफ याचिका में उठाए गए कड़े सवाल

याचिका में कहा गया है कि बिना किसी न्यायिक आदेश के फिल्म को अचानक हटाना संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत जनता के मौलिक अधिकार का हनन है। इसने उन हजारों वैध सब्सक्राइबर्स को भी इस कंटेंट से वंचित कर दिया है, जिन्होंने इसके लिए भुगतान किया था। याचिका में ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित इस फिल्म को हटाए जाने पर पारदर्शिता की कमी, कलात्मक स्वतंत्रता के हनन और पर्दे के पीछे से सरकारी हस्तक्षेप होने की आशंका जताई गई है।

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फिल्म

जसवंत सिंह खालरा के सच्चे जीवन पर आधारित है 'सतलुज'

याचिका में दलील दी गई है, "बिना किसी कानूनी अधिकार के दर्शकों को इस तरह कंटेंट से वंचित करना मनमाना, अनुचित और कानून के शासन के खिलाफ है। फिल्म 'सतलुज' दिवंगत जसवंत सिंह खालरा के वास्तविक जीवन और सच्चे तथ्यों पर आधारित एक बायोपिक है। ये फिल्म किसी भी तरह से देश की संप्रभुता और अखंडता को प्रभावित नहीं करती है और ना ही इसका उद्देश्य सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ना है।"

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