जसवंत सिंह खालरा कौन थे, जिनके ऊपर बनी दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज'?
क्या है खबर?
दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' ने एक बार फिर जसवंत सिंह खालरा को चर्चा में ला दिया है। हनी त्रेहन के निर्देशन में बनी यह फिल्म 4 जुलाई को डिजिटल प्लेटफॉर्म ZEE5 पर स्ट्रीम हुई थी, लेकिन अब इसे OTT से हटा दिया गया है। रिलीज के 2 दिनों के अंदर फिल्म को हटाए जाने से दर्शक भी हैरान और परेशान नजर आए। आइए जानते हैं खालरा के बारे में, जिनकी असल कहानी ने इस फिल्म को जन्म दिया।
परिचय
'सतलुज' में नजर आए खालरा असल जिंदगी में कौन थे?
खालरा, एक मानवाधिकार कार्यकर्ता थे। उनका जन्म 1952 में पंजाब के अमृतसर जिले के खालड़ा में हुआ था। 1980 के दशक में उन्होंने एक बैंक कर्मचारी के रूप में अपना करियर शुरू किया। ऑपरेशन ब्लू स्टार और 1984 के सिख विरोधी दंगे के दौरान जब लोग अचानक गायब होने लगे, तो उन्होंने खुद इसकी जांच का फैसला लिया। खालरा ने ऐसे सबूत जुटाए जिनमें कथित 25,000 से ज्यादा लावारिस शवों के चुपचाप दाह संस्कार करने की बात कही गई थी।
जांच
अचानक लापता हो गए थे खालरा
खालरा के आरोपों ने राज्य और दुनियाभर में तीखी बहस छेड़ दी थी। 6 सितंबर, 1995 को खालरा अमृतसर स्थित अपने घर के बाहर कार धोते हुए अचानक से लापता हो गए थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पंजाब पुलिस कर्मियों द्वारा उनका कथित अपहरण करने की बात सामने आई। उनके परिवार ने उनकी गुमशुदगी को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। मामले की जांच में CBI ने पाया कि खालरा को तरन तारन के एक पुलिस स्टेशन में रखा गया था।
सजा
पुलिसकर्मियों पर अपहरण और हत्या का आरोप
एजेंसी ने कई पुलिसकर्मियों पर अपहरण और हत्या मामले में केस चलाने की सिफारिश की। साल 2005 में, सुप्रीम कोर्ट ने मामले में पंजाब पुलिस के 6 पुलिसकर्मियों को खालरा के अपहरण और हत्या के लिए दोषी ठहराया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उनकी पत्नी परमजीत कौर खालरा अब पीड़ितों परिवारों के लिए सहारा बनी हुई हैं। दिलजीत की फिल्म 'सतलुज' खालरा के इसी संघर्षरत जीवन पर आधारित है, जिसमें अर्जुन रामपाल और कनवलजीत सिंह भी शामिल हैं।