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पत्रलेखा ने बॉलीवुड में महिलाओं के चित्रण पर उठाए सवाल- हमारा काम केवल सजना-संवरना नहीं
मातृत्व और करियर पर पत्रलेखा की बेबाकी

पत्रलेखा ने बॉलीवुड में महिलाओं के चित्रण पर उठाए सवाल- हमारा काम केवल सजना-संवरना नहीं

May 15, 2026
05:29 pm

क्या है खबर?

अभिनेत्री पत्रलेखा और राजकुमार राव की पत्नी ने हाल ही में अपने एक इंटरव्यू में समाज और इंडस्ट्री की पुरानी सोच पर तीखा प्रहार किया। मातृत्व, मानसिक स्वास्थ्य और करियर पर खुलकर बात करते हुए अभिनेत्री ने कहा कि एक महिला का अस्तित्व केवल पुरुषों, रोमांस या ग्लैमरस दिखने तक सीमित नहीं है। मां बनने के बाद अपनी बदलती जिंदगी और संघर्षों को साझा कर पत्रलेखा ने बॉलीवुड फिल्माें में महिलाओं की असली ताकत और पहचान का मुद्दा उठाया है।

बदलाव

अब अपनी विरासत को लेकर ज्यादा फिक्रमंद पत्रलेखा

वैराइटी इंडिया से बातचीत में पत्रलेखा ने बताया कि मातृत्व ने काम के प्रति उनके नजरिए को पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने खुलासा किया कि फिलहाल वो एक्टिंग प्रोजेक्ट्स के बजाय प्रोडक्शन और अपनी बेटी के साथ समय बिताने को प्राथमिकता दे रही हैं। पत्रलेखा ने कहा, "अब सब कुछ अलग लगता है, क्योंकि किसी दिन मेरी बेटी ये फिल्में देखेगी। अब आप ये सोचने लगते हैं कि आप विरासत में क्या छोड़कर जा रहे हैं।"

शर्त

सेट पर सुकून और सकारात्मकता अब पत्रलेखा की पहली शर्त

पत्रलेखा ने बताया कि अब वो अपने काम के माहौल को लेकर काफी सतर्क हो गई हैं। उन्होंने कहा, "मैं अब ऐसे सेट्स पर काम नहीं करना चाहती जहां नकारात्मकता हो। फिल्म बनाते समय आप हफ्तों लोगों के साथ बिताते हैं, इसलिए मुझे एक व्यक्ति और एक कलाकार के तौर पर सकारात्मक महसूस करना जरूरी है। मानसिक स्वास्थ्य अब इतना महत्वपूर्ण है कि इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।" पत्रलेखा को दिखावे की नहीं, अब टिकाऊ काम की चाह है।

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दो टूक

"सिर्फ रोमांस और सुंदर दिखना ही हमारी जिंदगी नहीं"

पत्रलेखा बोलीं, "बतौर महिला ऐसी कहानियां पढ़ना रोमांचक होता है, जो महिलाओं के संघर्षों और उनकी असली ताकत को दिखाती हैं। महिलाओं की जिंदगी सिर्फ पुरुषों, रोमांस या खूबसूरत दिखने तक सीमित नहीं। इसमें बहुत संघर्ष है, जो पर्दे पर अब भी कम ही दिखता है।" पत्रलेखा ने कहा कि बॉलीवुड अब भी महिला प्रधान फिल्मों को पूरा समर्थन नहीं देता, जबकि दर्शक ऐसी कहानियां देखना चाहते हैं। उन्होंने हॉलीवुड फिल्म 'द डेविल वीयर्स प्राडा 2' का उदाहरण भी दिया।

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करियर

पत्रलेखा की पिछली फिल्म

पत्रलेखा अब अभिनय, प्रोडक्शन और मातृत्व के बीच संतुलन बनाते हुए इंडस्ट्री के पुराने फॉर्मूलों के बजाय ईमानदार कहानियों को प्राथमिकता दे रही हैं। हंसल मेहता की फिल्म 'सिटीलाइट्स' से उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा था और पहली ही फिल्म में 'राखी' के चुनौतीपूर्ण किरदार से अपनी पहचान बना ली थी। पिछली बार वो प्रतीक गांधी संग फिल्म 'फुले' में दिखीं, जिसमें उन्होंने भारतीय समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले की भूमिका निभाकर दर्शकों के साथ-साथ समीक्षकों से भी खूब वाहवाही लूटी।

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