पहलगाम के एक साल बाद, जम्मू-कश्मीर ने फिल्म संस्कृति को फिर से किया जिंदा; उमर अब्दुल्ला ने दिए शानदार ऑफर
जम्मू और कश्मीर में हाल ही में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल आयोजित हुआ है। उम्मीद की जा रही है कि इससे यह क्षेत्र फिल्म निर्माताओं के लिए पसंदीदा जगह के तौर पर अपनी पुरानी पहचान फिर से हासिल कर लेगा।
साल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद इस क्षेत्र में फिल्मों से जुड़ी गतिविधियां रुक गई थीं, लेकिन मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला फिल्म निर्माताओं को फिर से यहां लाने और स्थानीय फिल्म उद्योग को दोबारा खड़ा करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
फिल्म निर्माताओं ने की कश्मीर की तारीफ
इम्तियाज अली और विधु विनोद चोपड़ा जैसे जाने-माने फिल्मकार इस फेस्टिवल में शामिल हुए। उन्होंने कश्मीर के अनोखे माहौल और यहां की अद्भुत प्रतिभा की खूब तारीफ की।
उमर ने शूटिंग के लिए आसानी से परमिट दिलाने, शूटिंग पर सब्सिडी देने और उन फिल्मों को प्रोत्साहन देने की योजना का ऐलान किया जो कश्मीरी संस्कृति को बढ़ावा दें और स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर दें।
इम्तियाज ने अपनी फिल्म 'लैला मजनू' की शूटिंग के बाद कश्मीर को बेहद खास बताया था, वहीं विधु ने कहा कि यह फेस्टिवल कश्मीरी कहानियों को दुनिया तक पहुंचाने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है।