NIF फेलोशिप में बड़ा बदलाव, जानें नॉन-फिक्शन लेखकों के लिए क्या होगा खास?
2026 से न्यू इंडिया फाउंडेशन (NIF) की बुक फेलोशिप, जो भारत के नॉन-फिक्शन लेखकों को समर्थन करती है, अब साल में केवल एक बार तीन महीने के लिए आवेदन स्वीकार करेगी।
चुने गए लेखकों को हर महीने स्टाइपेंड मिलेगा, उन्हें एडिटिंग में सहायता मिलेगी, एक मार्गदर्शक भी मिलेगा और इससे वे लेखकों व विचारकों के एक बड़े समूह से जुड़ सकेंगे।
क्यों लिया गया फेलोशिप को साल में एक बार करने का फैसला?
फेलोशिप को साल में एक बार करने का फैसला इसलिए लिया गया है ताकि विषयों में और विविधता लाई जा सके और लेखकों को जल्दी दोबारा आवेदन करने का अवसर मिले।
NIF बोर्ड की सदस्य नीराज गोपाल जयाल ने इसे NIF के लिए एक स्वाभाविक अगला कदम बताया है। उनके साथी बोर्ड सदस्य श्रीनाथ राघवन ने कहा कि नॉन-फिक्शन की मांग काफी बढ़ गई है, जिससे यह पता चलता है कि आज के भारत को समझने के लिए यह कितना अहम हो गया है।
NIF पूर्व छात्रों के समूह को चाहता है बढ़ाना
हर साल नए बैच जुड़ने से NIF को उम्मीद है कि उसके पूर्व छात्रों का समूह और बड़ा होगा और इससे बेहतरीन नॉन-फिक्शन किताबें लगातार मिलती रहेंगी।
फाउंडेशन का मानना है कि भारत की कहानी को समझने के लिए नॉन-फिक्शन बेहद अहम है और वे ऐसे लेखकों का समर्थन करना चाहते हैं, जो इस विषय पर नई दिशा देते हैं।