नवाजुद्दीन सिद्दीकी के वो यागदार किरदार, जिन्होंने बदलकर रख दी अभिनय की परिभाषा
क्या है खबर?
नवाजुद्दीन सिद्दीकी 19 मई को 52 साल के हो चुके हैं। वह सिनेमा के उन सितारों में शामिल हैं, जिन्होंने अपने दौर में अभिनय के ढर्रे को पूरी तरह बदल दिया। किरदार चाहें जो हो, नवाजुद्दीन अपनी आंखों और चेहरे के हाव-भाव से पूरी कहानी बयां करने का हुनर रखते हैं। तभी तो उनकी फिल्मों का दर्शकों को बेसब्री से इंतजार रहता है। चलिए एक नजर डालते हैं उनकी कुछ ऐसी फिल्मों पर, जिनमें उनका किरदार यादगार बन चुका है।
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'गैंग्स ऑफ वासेपुर'
नवाजुद्दीन की यादगार और लोकप्रिय सफल फिल्मों में 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' भी है। इसमें उन्होंने 'फैसल खान' की यादगार भूमिका निभाई, जो भारतीय क्राइम फिल्मों में उनका सबसे दमदार प्रदर्शन साबित हुआ है। अपनी बोली, लहजा और बॉडी लैंग्वेज से वह रातों-रात सुपरस्टार बन गए। खासतौर पर फिल्म में उनका डायलॉग "बाप का, दादा का, भाई का, सबका बदला लेगा रे तेरा फैसल" आज भी हर किसी की जुबान पर रहता है। फिल्म अमेजन प्राइम वीडियो पर है।
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'सेक्रेड गेम्स' और 'बजरंगी भाईजान'
सैफ अली खान की सीरीज 'सेक्रेड गेम्स' में नवाजुद्दीन ने 'गणेश गायतोंडे' बनकर जो क्रूरता दिखाई, उसे देखकर लोग उनके अभिनय के मुरीद बन बैठे। यह यह भारतीय सिनेमा का सबसे आइकॉनिक किरदार माना जाता है। सीरीज में उनका डायलॉग "कभी-कभी लगता है कि अपुन ही भगवान है" खूब लोकप्रिय हुआ था। एक पाकिस्तानी पत्रकार बनकर उन्होंने सलमान खान की फिल्म 'बजरंगी भाईजान' में तहलका मचा दिया था। अपनी बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग से अभिनेता ने सबका दिल जीत लिया।
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'मंटो' और 'बदलापुर'
लेखक सआदत हसन मंटो के रूप में नवाजुद्दीन ने फिल्म 'मंटो' में बेहद शानदार अभिनय किया है। इस फिल्म में उन्होंने लेखक के गुस्से, उनके दर्द और उनकी मानसिक स्थिति को अपनी आंखों से इस कदर कैमरे के सामने उतारा था कि दर्शक भी हैरान रह गए। इसमें उनका अभिनय सबसे प्रभावशाली नजर आया। वरुण धवन की फिल्म 'बदलापुर' में, नवाजुद्दीन ने 'लायक' नाम के विलेन का किरदार निभाया था। उनका यह किरदार पूरी फिल्म पर भारी पड़ गया था।