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मुमताज की खरी-खरी, बोलीं- मुस्लिम पुरुष 3-4 शादियां कर पत्नियां छोड़ देते हैं; हिंदू इनसे बेहतर 
मुमताज का खुला बयान, 3-4 शादियां करना सरासर गलत, हिंदू बेहतर

मुमताज की खरी-खरी, बोलीं- मुस्लिम पुरुष 3-4 शादियां कर पत्नियां छोड़ देते हैं; हिंदू इनसे बेहतर 

Mar 12, 2026
06:43 pm

क्या है खबर?

दिग्गज अभिनेत्री मुमताज ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान अंतरधार्मिक विवाह और एक से अधिक शादियों (बहुविवाह) की प्रथा पर अपनी बेबाक राय साझा की है। उन्होंने सवाल उठाया कि 3-4 शादियां करने से कोई इंसान बेहतर कैसे बन सकता है? अपनी निजी जिंदगी और शादी के अनुभवों को साझा करते हुए मुमताज ने रिश्तों में वफादारी और आपसी सम्मान को सबसे ऊपर बताया है। क्या कुछ बोलीं मुमताज, आइए जानते हैं।

आस्था

मुमताज बोलीं- भगवान शंकर और कृष्ण मेरे सबसे प्रिय

मुमताज ने हाल ही में अपनी आध्यात्मिक मान्यताओं पर खुलकर बात की। एक मुस्लिम परिवार में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने हिंदू देवी-देवताओं में अपनी गहरी श्रद्धा प्रकट की है। मुमताज ने बताया कि वो भगवान शिव और भगवान कृष्ण की परम भक्त हैं और उनका मानना है कि आस्था किसी एक धर्म की सीमाओं में नहीं बंधी होती। वो बोलीं, "भगवान शंकर और भगवान कृष्ण मेरे सबसे प्रिय हैं। मुस्लिम होने के बावजूद, मैं उनमें गहरी आस्था रखती हूं।"

विश्वास

मुस्लिम पृष्ठभूमि के बावजूद मुमताज का शिव और गणेश में अटूट विश्वास

मुमताज बोलीं, "भक्ति मेरे रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा है। मेरे घर की सीढ़ियों पर भगवान गणेश की एक मूर्ति स्थापित है। जब भी मैं वहां से गुजरती हूं, श्रद्धा के साथ उन्हें नमन करती हूं। मैं भगवान शंकर में भी विश्वास रखती हूं। बचपन से ही मुझे सुंदर लोग हमेशा अच्छे लगते थे और मुझे लगता है कि शिव सबसे सुंदर देवता हैं, इसलिए मैं उन्हें प्रेम करती हूं। ये वो 2 देवता हैं, जिनमें मेरी विशेष आस्था है।"

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विचार

"अंतरधार्मिक शादी में धर्म कभी नहीं बनता बाधा"

इसी इंटरव्यू के दौरान मुमताज ने मयूर माधवानी के साथ अपनी अंतरधार्मिक शादी पर भी विचार साझा किए और कहा कि उनके रिश्ते में धर्म कभी बाधा नहीं बना। उन्होंने कहा, "मैं दोनों धर्मों में विश्वास रखती हूं। मैंने एक हिंदू से शादी की और मेरी बहन ने भी एक हिंदू से शादी की। हम दोनों खुश हैं। मेरे पति मेरा बहुत ख्याल रखते हैं।" मुमताज का मानना है कि धर्म प्यार के बीच नहीं आना चाहिए।

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दो टूक

मैं हिंदू-मुस्लिम विभाजन में विश्वास नहीं रखती- मुमताज

बातचीत में मुमताज बोलीं, "समझ नहीं आता कि लोग हिंदू और मुस्लिम विभाजन के बारे में इतनी बातें क्यों करते रहते हैं। मैं इन सब में विश्वास नहीं रखती।" मुमताज ने बहुविवाह (एक से अधिक शादियां) पर भी अपने निजी विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा, "मैं पुरुषों के कई बार शादी करने की प्रथा से सहमत नहीं हूं। मैं हमेशा कहती हूं कि मैंने एक हिंदू से शादी की और मेरी बहन ने भी और हम बहुत खुश हैं।"

सलाह

बहुविवाह गलत, रिश्तों में वफादारी जरूरी

मुमताज ने कहा, "कई मुस्लिम पुरुष 3 या 4 बार शादी कर पत्नियों को छोड़ देते हैं। इससे मुसलमान, हिंदुओं से बेहतर कैसे हो जाते हैं? मैं खुद मुस्लिम हूं और कहती हूँ कि ये lसरासर गलत है। एक पत्नी को छोड़कर दूसरी या तीसरी शादी करना बिल्कुल सही नहीं।" उन्होंने इसे 'पाप' करार देते हुए कहा कि रिश्तों में वफादारी होनी चाहिए, क्योंकि हर महिला अपने साथी को लेकर संवेदनशील होती है और ऐसा करना उनके साथ नाइंसाफी है।

टिकाव

शादी में स्थिरता के मामले में हिंदू, मुस्लिम से बेहतर

मुमताज का मानना है कि हिंदू समाज में शादियों में अधिक ठहराव देखा जाता है और इस नजरिए से देखें तो उन्हें हिंदू, मुस्लिम से बेहतर लगते हैं, क्योंकि वे आमतौर पर इतनी आसानी से एक को छोड़कर दूसरे की ओर नहीं बढ़ जाते।

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