बुसान फिल्म फेस्टिवल में मलयालम फिल्म 'चेविटोरम्मा' का जलवा, निर्देशक के बचपन की एक याद पर बनी फिल्म
लेखक व निर्देशक लियो थाडियस की मलयालम फिल्म 'चेविटोरम्मा' ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का मान बढ़ाया है। ये फिल्म दुनिया के प्रतिष्ठित बुसान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (BIFF) के लिए चुनी गई है।
निर्देशक की बचपन की एक याद पर आधारित इस फिल्म की कहानी 2 अहम किरदारों मरणासन्न स्थिति में पहुंचे 'वर्कियाचन' और 'थ्रेसिया' के बीच की भावुक बातचीत के इर्द-गिर्द घूमती है। ये कहानी उनके जरिए जीवन में माफी, पुराने जख्मों को भरने और आत्मिक शांति पाने के सफर को बेहद संवेदनशीलता से पर्दे पर उकेरती है।
'चेविटोरम्मा' ने दुनियाभर से बटोरीं तारीफें
थाडियस ने इस फिल्म को जीवन के अंतिम क्षणों पर आधारित एक ध्यानपूर्ण यात्रा बताया है। फिल्म में दिलीश पोथन और पॉली वाल्सन जैसे कलाकारों ने काम किया है। फिल्म के पोस्ट-प्रोडक्शन का काम काफी मुश्किलों भरा रहा। यहां तक कि एक ईरानी कंपोजर को युद्ध के दौरान भी काम करना पड़ा। इन सब चुनौतियों के बाद भी 'चेविटोरम्मा' को इसकी भावुक कहानी के लिए दुनियाभर से तारीफ मिली है।