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प्रकाश राज बॉलीवुड पर बरसे, बोले- सब फर्जी; अपनी जड़ें खो चुका हिंदी सिनेमा
प्रकाश राज ने जमकर की बॉलीवुड की आलोचना

प्रकाश राज बॉलीवुड पर बरसे, बोले- सब फर्जी; अपनी जड़ें खो चुका हिंदी सिनेमा

Jan 25, 2026
03:37 pm

क्या है खबर?

दिग्गज अभिनेता प्रकाश राज अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं और एक बार फिर उन्होंने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री (बॉलीवुड) पर तीखा हमला बोला है। एक हालिया साक्षात्कार में अभिनेता ने निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि हिंदी फिल्में अपनी मौलिकता और मिट्टी की खुशबू खो चुकी हैं। प्रकाश के अनुसार, आज का हिंदी सिनेमा केवल पैसा कमाने की होड़ और बनावटीपन तक सीमित रह गया है। क्या कुछ बोले प्रकाश, आइए जानते हैं।

कटाक्ष

'मैडम तुसाद म्यूजियम' से कर दी बॉलीवुड की तुलना

प्रकाश ने केरल लिटरेचर फेस्टिवल के नौवें संस्करण के दौरान बॉलीवुड पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्हाेंने बॉलीवुड की तुलना 'मैडम तुसाद म्यूजियम' से करते हुए कहा कि ये फिल्में अब उस म्यूजियम की तरह हो गई हैं, जहां सब कुछ बाहर से बहुत सुंदर और चमकदार दिखता है, लेकिन उनके भीतर कोई गहराई या सार नहीं होता। उन्होंने कहा कि हिंदी फिल्मों में अब असलियत की कमी है और वे केवल सतही खूबसूरती तक सिमटकर रह गई हैं।

दो टूक

"बाहर से खूबसूरत, अंदर से खाली"

प्रकाश के अनुसार, हिंदी सिनेमा अपनी रूह और कहानी कहने के मौलिक अंदाज को खोता जा रहा है। वो बोले, "मलयालम और तमिल सिनेमा बहुत प्रभावशाली फिल्में बना रहे हैं। ये फिल्में अपनी जमीन से जुड़ी हुई हैं। उधर हिंदी सिनेमा ने अपनी जड़ें खो दी हैं। वहां सब कुछ शानदार तो दिखता है, लेकिन वो पूरी तरह 'प्लास्टिक' जैसा है। ठीक वैसा ही, जैसा आप मैडम तुसाद म्यूजियम में देखते हैं, बाहर से सब खूबसूरत, लेकिन अंदर से बेजान।"

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तारीफ और आलोचना

साउथ सिनेमा की तारीफ, बॉलीवुड के पतन की वजह गिनाईं

प्रकाश ने कहा, "साउथ में सुनाने के लिए अपनी कहानियां हैं। आज तमिल सिनेमा के नए और युवा निर्देशक दलित मुद्दों और सामाजिक सरोकारों पर बात कर रहे हैं। हिंदी सिनेमा का पतन तब शुरू हुआ, जब इसने अपनी जड़ों को छोड़कर मुख्य रूप से केवल शहरी दर्शकों को लुभाना शुरू कर दिया। मल्टीप्लेक्स के आने के बाद फिल्में केवल एक खास वर्ग के लिए बनने लगीं, जिससे आम जनता और ग्रामीण भारत की कहानियां पर्दे से गायब हो गईं।

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फिल्में

कई हिंदी फिल्मों में काम कर चुके हैं प्रकाश

प्रकाश के मुताबिक, बॉलीवुड ने मल्टीप्लेक्स दर्शकों को ध्यान में रखकर सतही फिल्में बनानी शुरू कर दीं, जिससे वो ग्रामीण भारत और आम आदमी की कहानियों से कट गया। 'पेज 3 कल्चर' और शहरी दिखावे के चलते हिंदी सिनेमा से सामाजिक सरोकार और राष्ट्र-निर्माण वाला जज्बा धीरे-धीरे खत्म हो गया। बता दें कि प्रकाश भारतीय सिनेमा के उन कलाकारों में से हैं, जिन्होंने न केवल साउथ फिल्मों, बल्कि सिंघम और वॉन्टेड जैसी कई हिंदी फिल्मों में भी काम किया है।

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